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सुना है क्या: आज 'उद्योगों वाले महकमे में कमीशन का खेल, एक फोटो फ्रेम में कई मुखिया व दाग अच्छे हैं' के किस्से

Mon, 15 Dec 2025 03:16 PM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासन में तमाम ऐसे किस्से हैं, जो हैं तो उनके अंदरखाने के... लेकिन, चाहे-अनचाहे बाहर आ ही जाते हैं। ऐसे किस्सों को आप अमर उजाला के "सुना है क्या" सीरीज में पढ़ सकते हैं। तो आइए पढ़ते हैं इस बार क्या है खास...
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सुना है क्या/suna hai kya - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यूपी के राजनीतिक गलियारे और प्रशासनिक गलियों में आज तीन किस्से काफी चर्चा में रहे। चाहे-अनचाहे आखिर ये बाहर आ ही जाते हैं। इन्हें रोकने की हर कोशिश नाकाम होती है। आज की कड़ी में 'उद्योगों वाले महकमे में कमीशन का बड़ा खेल' की कहानी है। इसके अलावा 'फोटो फ्रेम में कई मुखिया ने बढ़ाई धड़कन' और 'खेती किसानी वाले विभाग पर दाग' के किस्से भी चर्चा में रहे। आगे पढ़ें, नई कानाफूसी...

छोटे कामगार और बड़ा कमीशन

इन दिनों छोटे कामगारों व उद्योगों वाले महकमे में कमीशन का बड़ा खेल चल रहा है। बताते हैं कि सिखाने पढ़ाने के मद में जारी बजट के बड़े हिस्से से अफसर अपनी जेबें भरने में जुटे हैं। महकमे में नीचे से ऊपर तक चर्चा है कि इस मद की बंदरबांट हो गई और कई अधिकारी इसकी जद में आ गए। इस लेनदेन की जड़ें औद्योगिक नगरी से लेकर राजनीतिक नगरी तक फैली हैं। ऊपर तक शिकायतें भी हो गई हैं। अब तो आलम यह है कि पहले अंदरखाने कानाफूसी तक सीमित मामला अब खुलकर सामने आ गया है। जल्द ही कई बड़े अफसर लपेटे में आने की पूरी आशंका है।

फोटो फ्रेम में कई मुखिया ने बढ़ाई धड़कन

प्रदेश के एक प्रमुख विश्वविद्यालय के लिए मुखिया की खोज काफी दिनों से चल रही है। धीरे-धीरे यह अपने अंजाम तक पहुंच रही है। हाल में इसके लिए एक महत्वपूर्ण इंट्रैक्शन भी हुआ है। इसने जहां नए मुखिया के नामों की चर्चा में कुछ गिनती बढ़ा दी। वहीं सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक फोटो ने तो धड़कन ही बढ़ा दी है। एक फ्रेम में कई मुखिया को देखकर हलचल बढ़ गई है। इसके हिसाब से सभी अपने कयास लगा रहे हैं। हालांकि, इस तरह के इंट्रैक्शन में फोटो सेशन नहीं होता है। यह बताकर खुद को दिलासा भी दे रहे हैं।

दाग अच्छे हैं

खेती किसानी वाले विभाग पर दाग लग गया है। इसको लेकर कुछ लोग नाक-भौं सिकोड़ रहे हैं। वहीं, कुछ लोग मस्त हैं। वे कह रहे हैं कि दाग अच्छे हैं। वे दाग को समय की जरूरत बताते हैं। कहते हैं कि दो साल से दागदार वाले क्षेत्र में जाने के लिए कई लोग चक्कर लगा रहे हैं। अगर दाग खराब होते तो दागदार वाले इलाके में जाने के लिए भाव क्यों बढ़ते?

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