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धरे गए फर्जी कॉल सेंटर चलाकर ठगी करने वाले मास्टरमाइंड, कई राज्यों में फैला रखा था जाल

Tue, 19 Dec 2017 02:17 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, लखनऊ
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राजधानी लखनऊ के गोमतीनगर थानाक्षेत्र के विकासखंड में फर्जी कॉल सेंटर का खुलासा कर साइबर सेल की टीम ने सोमवार दोपहर चार युवकों को दबोच लिया। पकड़े गए युवक विभिन्न राज्यों में बैंकों के ग्राहक सेवा केंद्र की फ्रेंचाइजी दिलाने का झांसा देकर ठगी करते थे। ठगों के खिलाफ छत्तीसगढ़ के सूरजपुर के रामानुजनगर थाने में एफआईआर दर्ज है। कॉल सेंटर से दो कंप्यूटर, दो लैपटॉप, एक प्रिंटर, फर्जी आईडी से लिए गए 17 मोबाइल फोन, कार, बुलेट बाइक और फर्जी मुहरें बरामद हुई हैं।
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एएसपी पूर्वी सर्वेश कुमार मिश्रा ने बताया कि बदमाशों में बिहार के वैशाली महुवा लक्ष्मीनारायनपुर में रहने वाला गौरव राज, प्रतापगढ़ के पहाड़पुर बवरिहा निवासी देवदत्त शुक्ला, इलाहाबाद के उतराव सैदाबाद का सुशील मिश्रा व नई दिल्ली का मनीष चौहान शामिल है। देवदत्त गिरोह का सरगना है। चारों यहां गोमतीनगर थाने के पीछे किराए का कमरा लेकर रहते थे और पास ही एक मकान के बेसमेंट में कॉल सेंटर खोल रखा था।

उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में 23 अक्तूबर को करीब दो लाख रुपये ठगने का केस दर्ज हुआ था। वहां की पुलिस ने मोबाइल नंबरों की पड़ताल की तो ठगों की लोकेशन लखनऊ में मिली। छत्तीसगढ़ के रामानुजनगर थाने में तैनात एएसआई विराट वीसी, हेड कांस्टेबल हेमंत सोनवानी, कांस्टेबल विश्वजीत सिंह और रामसागर साहू लखनऊ पहुंचे और साइबर सेल की मदद से कॉल सेंटर पर छापा मारा। कॉल सेंटर में सात लड़कियां भी नौकरी कर रही थीं, जिन्हें पुलिस ने चेतावनी देकर छोड़ दिया। जबकि चारों संचालकों को गिरफ्तार कर कंप्यूटर-लैपटॉप व अन्य सामान जब्त कर लिया।
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पूछताछ में ठगों ने बताया कि वह कई साल से दिल्ली, हरियाणा व बिहार में कॉल सेंटर चला रहे थे। एएसपी पूर्वी ने बताया कि चारों को छत्तीसगढ़ पुलिस के सुपुर्द कर दिया गया है। पुलिस टीम में साइबर सेल के प्रभारी इंस्पेक्टर अरुण कुमार सिंह, इंस्पेक्टर विजयवीर सिंह सिरोही, कांस्टेबल फिरोज बदर, अखिलेश कुमार, शरीफ खान, संतोष कुमार, रामप्रवेश मौर्या, महिला कांस्टेबल चित्रलेखा शामिल थे।
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आईटीआई से डिप्लोमा करने के बाद की शुरूआत

साइबर सेल के इंस्पेक्टर ने बताया कि ठगों के गिरोह का मास्टरमाइंड वैशाली निवासी होम्योपैथिक डॉक्टर का बेटा गौरव राज है। उसने इंटर के बाद आईटीआई से डिप्लोमा किया और ठगी का धंधा शुरू कर दिया। वह कंपीटीशन की पढ़ाई के नाम पर तीन महीने पहले लखनऊ आया और कॉल सेंटर चला रहे देवदत्त शुक्ला के साथ जुड़ गया। इंस्पेक्टर ने बताया कि सुशील और मनीष दिल्ली के एक कॉल सेंटर में नौकरी करते थे।

किसी दोस्त के जरिए उनकी मुलाकात देवदत्त शुक्ला से हुई। देवदत्त और गौरव मिलकर एक कॉल सेंटर खोलकर ठगी की साजिश बुन रहे थे। सुशील और मनीष के साथ आने पर चारों ने कॉल सेंटर शुरू किया। गौरव ने गो डैडी के जरिए डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट विन टु विन डॉट कॉम नाक की वेबसाइट बनाई और गूगल के जरिए हजारों मोबाइल नंबर का डॉटा हासिल कर लड़कियों के जरिए लोगों को कॉल कराने लगा।

स्क्रिप्ट पढ़कर लोगों को जाल में फंसाते थे ठगे
गौरव ने ठगी के लिए एक स्क्रिप्ट तैयार की थी। कॉल सेंटर में काम करने वाली लड़कियां स्क्रिप्ट पढ़कर ही लोगों से संपर्क करती थीं। शातिर ठग बैंकों के ग्राहक सेवा केंद्र (मिनी बैंक) खोलने का झांसा देते थे। यह केंद्र मिनी बैंक की तरह ही काम करते थे। जो लोग केंद्र खोलने के लिए राजी हो जाते, उनसे अपनी वेबसाइट डब्ल्यूडब्ल्यूडब्ल्यू डॉट विन टु विन डॉट कॉम पर रजिस्ट्रेशन कराने के नाम पर बैंक खाते में 1500 रुपये जमा कराए जाते। मिनी बैंक में पॉइंट ऑफ सेल (पीओएस) मशीन लगाने के नाम पर 6500 रुपये जमा कराए जाते थे।
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