अपने पिलरों पर इश्तिहार लगाने के बावजूद मेट्रो को अभी तक नगर निगम को विज्ञापन टैक्स नहीं देना पड़ रहा था। हालांकि, नई विज्ञापन उपविधि आने के बाद अब उसे लाइसेंस शुल्क देना होगा। नगर निगम ने करीब 50 लाख रुपये की लाइसेंस फीस जमा करने के लिए पहली बार नोटिस दिया है।
जीएसटी आने के पहले नगर निगम शहर लगने वाली होर्डिंग व अन्य प्रचार पर विज्ञापन कर वसूलता था। जीएसटी में विज्ञापन कर वसूलने का अधिकार खत्म हो गया। इसके बाद नगर निगम उपविधि बनाकर विज्ञापन कर के बजाय विज्ञापन अनुज्ञा शुल्क वसूलने लगा, जिसकी मंजूरी भी शासन से मिल चुकी है।
]वहीं, नई उपविधि में मेट्रो पर विज्ञापन लाइसेंस शुल्क वसूली का अधिकार भी मिल गया है। पहले शासन से जारी आदेश में मेट्रो को विज्ञापन कर से छूट मिली थी, जो नई उपविधि में नहीं है। ऐसे में अब मेट्रो को भी विज्ञापन अनुज्ञा शुल्क देना होगा। नगर निगम ने 49,19,460 रुपये विज्ञापन अनुज्ञा शुल्क जमा करने का नोटिस लखनऊ मेट्रो रेल कार्पोरेशन के प्रबंध निदेशक को भेजा है।