तबादले के बाद कार्यमुक्त करने में विलंब करना भी शासन और डीजीपी के आदेशों की अवलेहना है। कई बार इस संबंध में सोशल मीडिया पर शिकायतें होती हैं, जिससे काफी प्रतिकूल स्थितियों का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति आपत्तिजनक है।
डीजीपी मुख्यालय ने प्रांतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों के तबादलों को निरस्त, संशोधित एवं स्थगित करने की प्रवृत्ति पर नाराजगी जताई है। एडीजी प्रशासन नीरा रावत ने इस बाबत समस्त कमिश्नरेट और जिलों के पुलिस कप्तानों को पत्र लिखकर कहा कि मुख्यालय और शासन की सहमति से होने वाले पीपीएस अफसरों के तबादले के बाद उनको तत्काल कार्यमुक्त किया जाए। यदि संबंधित अधिकारी को कोई समस्या है, तो तबादला आदेश का पालन करने के बाद वह अपना प्रत्यावेदन मुख्यालय भेज सकता है।
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दरअसल, मुख्यालय के संज्ञान में आया है कि पीपीएस अफसरों का तबादला आदेश जारी होने के बाद जिले एवं इकाई के प्रभारी बिना किसी ठोस आधार के कुछ अधिकारियों का तबादला निरस्त, संशोधित एवं स्थगित करने का अनुरोध करते हैं। ये तबादले जिले एवं इकाई के कार्यों की गंभीरता एवं कानून-व्यवस्था की संवेदनशीलता के दृष्टिगत गहनता से विचार करने के बाद डीजीपी मुख्यालय एवं शासन के अनुमोदन से किया जाता है।
इसके अलावा कुछ पीपीएस अधिकारी अपना तबादला आदेश निरस्त एवं संशोधित करने का अनुरोध स्वयं या अपने परिवार के सदस्यों से कराते हैं, जो उप्र सरकारी कर्मचारी आचरण नियमावली का उल्लंघन है। वहीं, तबादले के बाद कार्यमुक्त करने में विलंब करना भी शासन और डीजीपी के आदेशों की अवलेहना है। कई बार इस संबंध में सोशल मीडिया पर शिकायतें होती हैं, जिससे काफी प्रतिकूल स्थितियों का सामना करना पड़ता है। यह स्थिति आपत्तिजनक है।