इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ लखनऊ पीठ ने स्वामी प्रसाद मौर्य की तरफ से दाखिल वाई या जेड श्रेणी की सुरक्षा मुहैया करवाने की याचिका को महत्वहीन मानते हुए खारिज कर दिया। हालांकि कोर्ट ने याचीकर्ता को यह छूट दी है कि अगर वह सुरक्षा संबंधी कमिशनरेट स्तर के निर्णय से संतुष्ट नहीं है तो इसके खिलाफ किसी सक्षण कोर्ट या फोरम के समक्ष चुनौती प्रस्तुत कर सकता है। यह आदेश न्यायमूर्ति देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति ओम प्रकाश शुक्ल की खंडपीठ ने स्वामी प्रसाद मौर्य की तरफ से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया।
श्रीरामचरित मानस की कुछ चौपाइयों पर विवादास्पद टिप्पणी के बाद अपनी मौजूदा सुरक्षा पर्याप्त न होने की बात कहते हुए याचिका के माध्यम से स्वामी प्रसाद मर्या ने वाई या जेड श्रेणी सुरक्षा मुहैया करवाने की मांग की थी। याची के अधिवक्ता का कहना था कि एमएलसी होने के नाते उन्हें मौजूदा समय सिर्फ दो गनर मिले हैं। जो उनकी सुरक्षा पर मंडराते खतरे को देखते हुए पर्याप्त नहीं हैं। ऐसे में कोर्ट से याची की सुरक्षा बढ़ाए जाने का आदेश देने की मांग की गई।
सरकारी वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि खतरे की आशंका के आकंलन कर सुरक्षा संबंधी निर्णय कमिशनरेट स्तर की समिति लेती है। बीते 22 मार्च को समिति की हुई बैठक में याची की मौजूदा सुरक्षा न बढ़ाए जाने का निर्णय लिया गया है। इस निर्णय की प्रति भी याची के वकील को उपलब्ध करा दी गई है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने माना कि ऐसे में यह याचिका महत्वहीन हो गई है। लिहाजा इसे खारिज किया जाता है।