मामला दिसंबर, 2020 का है। जलालाबाद डिपो के नाम से बस संख्या (यूपी 42 एटी 0648) हादसे की शिकार हो गई थी। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी। तत्कालीन प्रबंध निदेशक धीरज साहू ने इसकी जांच करवाई तो पता चला कि सहारनपुर क्षेत्र के अंतर्गत जलालाबाद डिपो के नाम से बिना रिकॉर्ड बस अड्डा चलाया जा रहा है।
परिवहन निगम में फर्जी बस अड्डे की जांच रिपोर्ट की गायब फाइल सोमवार को मीडिया में खबर छपते ही मिल गई। रोडवेज मुख्यालय में दिनभर इसके लेकर गहमागहमी रही। पर किसी को फर्जी बस अड्डे की बस हादसे में तीन यात्रियों की मौत का अफसोस नहीं था। अधिकारियों को सिर्फ रोडवेज की छवि खराब होने की चिंता सत्ता रही थी। इसी बीच गायब फाइल मिल गई। हालांकि इसके पीछे परिवहन निगम के प्रबंध निदेशक संजय कुमार की सख्ती रंग लाई है। कोई भी अधिकारी गायब फाइल की जांच रिपोर्ट साझा करने से बच रहे हैं।
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दरअसल मामला दिसंबर, 2020 का है। जलालाबाद डिपो के नाम से बस संख्या (यूपी 42 एटी 0648) हादसे की शिकार हो गई थी। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी। तत्कालीन प्रबंध निदेशक धीरज साहू ने इसकी जांच करवाई तो पता चला कि सहारनपुर क्षेत्र के अंतर्गत जलालाबाद डिपो के नाम से बिना रिकॉर्ड बस अड्डा चलाया जा रहा है। वह पूरी तरह से फर्जी है। उस वक्त क्षेत्रीय प्रबंधक मनोज कुमार पुंडीर पर परिवहन निगम मुख्यालय से बगैर अनुमति बस अड्डा चलाने का आरोप लगा और उनके निलंबन की संस्तुति हुई। इसी बीच मामले की जांच रिपोर्ट की फाइल गायब हो गई।
सोमवार को मीडिया में संबंधित खबरें प्रकाशित होने के बाद अधिकारियों की सख्त हिदायत पर बाबुओं ने फाइल तलाशी। पर हद तो यह है कि अधिकारी फाइल गायब होने की बात सिरे से नकार रहे हैं। अगर ऐसा था तो एमडी संजय कुमार के मांगने पर उन्हें फाइल क्यों नहीं दी गई, इसका जवाब संबंधित अधिकारियों के पास नहीं था। वर्तमान में आरोपी मनोज पुंडीर क्षेत्रीय प्रबंधक लखनऊ के साथ ही प्रभारी प्रधान प्रबंधक, कार्मिक भी हैं। एमडी संजय कुमार ने मामले में पुंडीर को बुलाकर पूछताछ की है। इतना ही नहीं, उन्होंने इस मामले में आला अधिकारियों के साथ भी चर्चा की है।
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अपर प्रबंध निदेशक अन्नपूर्णा गर्ग ने बताया कि जलालाबाद डिपो के मामले से जुड़ी फाइल परिवहन निगम के पास मौजूद है। इसमें जांच रिपोर्ट संलग्न है। पर उन्होंने जांच रिपोर्ट साझा करने से इन्कार कर दिया है।