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लखनऊ मेट्रो को 150 एकड़ की जगह मिलेगी 80 एकड़ जमीन

Mon, 09 Dec 2019 05:40 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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लखनऊ मेट्रो।
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लखनऊ मेट्रो को सीजी सिटी में मिलने वाली जमीन में कटौती की गई है। एलडीए अब 150 एकड़ की जगह करीब 80 एकड़ जमीन ही लखनऊ मेट्रो को उसके आवासीय प्रोजेक्ट के लिए देगा। सड़क व अन्य अवस्थापना सुविधाओं के साथ ही अंबेडकर महासभा और अटल चिकित्सा विश्वविद्यालय को जमीन देने के लिए यह कटौती की जा रही है।

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जमीन में कटौती कर नि:शुल्क जमीन दिए जाने का प्रस्ताव अब प्रदेश सरकार की उच्चस्तरीय समिति में रखा जाएगा। एलडीए के रिकॉर्ड के मुताबिक लखनऊ मेट्रो के लिए यात्री किराए से अलग आय के स्रोत विकसित करने को सीजी सिटी में 150 एकड़ जमीन दिए जाने पर सहमति बनी थी।

यहां लखनऊ मेट्रो को अपना आवासीय प्रोजेक्ट लॉन्च करना था। भवनों को किराये पर देकर लखनऊ मेट्रो को आय होती। यह जमीन लखनऊ मेट्रो को प्रोजेक्ट के लिए लोन दिलाने में भी गारंटी के तौर पर काम आती। अभी तक यह जमीन लखनऊ मेट्रो को नहीं दी जा सकी है।
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अंबेडकर महासभा के बाद अब अटल विश्वविद्यालय को दी जा रही जमीन
पूर्व में अंबेडकर महासभा को जमीन दिए जाने के बाद यह 146 एकड़ रह गई। अब अटल विश्वविद्यालय को भी 50 एकड़ जमीन प्रदेश सरकार की कैबिनेट से स्वीकृति मिलने के बाद आवंटन लखनऊ मेट्रो के लिए आरक्षित जमीन में से कर दिया गया।

अलग-अलग संस्थाओं के लिए कटौती के बाद अब केवल 80 एकड़ जमीन ही लखनऊ मेट्रो के लिए रह गई है। इसी महीने प्रस्तावित उच्चस्तरीय समिति की बैठक में इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। इसके बाद जमीन पर कब्जा देने की कार्रवाई एलडीए शुरू करेगा।

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बदलाव यह भी

डिपो के लिए बसंतकुंज में दी जमीन
एलडीए ने सीजी सिटी की जमीन में कटौती लखनऊ मेट्रो को बसंतकुंज में दी गई जमीन के बदले भी की है। बसंतकुंज में एलडीए ने लखनऊ मेट्रो को डिपो का निर्माण करने के लिए 30.43 एकड़ जमीन दी है। इसके बदले सीजी सिटी में दी जाने वाली जमीन में कटौती कर ली गई है।

स्टेडियम के पास नहीं मिलेगी जमीन
लखनऊ मेट्रो को अब नॉर्थ ब्लॉक में स्टेडियम और आईटी सिटी के पास मौके की जमीन नहीं मिलेगी। इनको दूसरी संस्थाओं को दिए जाने की जरूरत बताते हुए जमीन वापस ली गई है। एलडीए अधिकारियों का तर्क है कि बसंतकुंज योजना में डिपो बनाने के लिए दी गई जमीन के बदले यहां के तीन भूखंड लिए गए हैं। तीनों भूखंड को संस्थागत उपयोग के लिए बताया जा रहा है।

एलडीए की दलील-सड़क, नाले बनाने में जमीन तो जाएगी
एलडीए के वित्त नियंत्रक राजीव कुमार सिंह का कहना है कि लखनऊ मेट्रो को 150 एकड़ जमीन मिलने का मतलब पूरे क्षेत्रफल से था। विकास कार्य कराने में सड़क, नाले और दूसरे विकास कार्य में भी जमीन उपयोग होती है। ऐसे में नेट एरिया निकालकर जमीन दी जानी है। पूरी 150 एकड़ के आवंटन पर भी 112 एकड़ जमीन ही मिलती। अब डिपो, अटल चिकित्सा विश्वविद्यालय आदि को जमीन दिए जाने के बाद जो नेट एरिया निकलेगा।
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