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लखनऊ मेट्रो: बनने लगे स्टेशन, आ रहे हैं कोच

Fri, 07 Aug 2015 03:24 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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आर्थिक मोर्चे पर लड़खड़ाती नजर आ रही राजधानी की मेट्रो रेल परियोजना के लिए पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (पीआईबी) की हरी झंडी मिलने के बाद इस पर चल रहे काम की रफ्तार भी बढ़ गई है।
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मेट्रो स्टेशन के लिए तो काम तेजी से चल ही रहा है साथ ही मेट्रो के काम ने भी रफ्तार पकड़ी है।

अभी तक रोलिंग स्टॉक और सिग्नलिंग का टेंडर फाइनल नहीं हुआ है। नार्थ-ईस्ट कॉरिडोर में टीपी नगर से मुंशीपुलिया के बीच मेट्रो रेल परियोजना के 80 कोच बनाए जाएंगे।

एलएमआरसी ने तय किया था कि पहले छह कोच जून-2016 तक कंपनी को देने होंगे। जबकि, परियोजना का तकनीकी परीक्षण शुरू होने से पहले हर हाल में सभी 80 कोच एलएमआरसी को मिल जाएंगे।
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इसका अर्थ था कि, दिसंबर-2016 से पहले। मेट्रो रेल परियोजना के रोलिंग स्टॉक और सिग्निलंग सिस्टम का काम करने के लिए विश्व स्तर की बड़ी कंपनियों ने काम करने की इच्छा जाहिर की है।

मगर इसमें कंपनियों ने ऋण देने वाली कंपनी की गारंटी मांगी है। ऐसे में पीआईबी के बाद ये गारंटी यूरोपियन यूनियन बैंक से आसानी से मिल जाएगी। अधिक से अधिक 50 सप्ताह का समय पहले ट्रेन आने में लगना है। सितंबर-2016 तक के लिए बस इतना ही समय लगभग बचा हुआ है।

देश में सबसे तेज प्रगति वाली मेट्रो

लखनऊ मेट्रो परियोजना को केंद्रीय मंजूरी नहीं मिलने से प्रोजेक्ट की प्रगति प्रभावित हो रही थी। निवेश के लिए शहरी विकास मंत्रालय ने वित्त मंत्रालय को प्रस्ताव भेज दिया था।

यूरोपियन इन्वेस्टमेंट बैंक और फ्रेंच एजेंसी की टीम लखनऊ का दौरा भी कर चुकी थीं। केंद्र सरकार ने चालू और पिछले वित्तीय वर्ष में 173 करोड़ रुपये लखनऊ मेट्रो के लिए पास किये थे। ये 173 करोड़ रुपये जल्द ही एलएमआरसी को मिल जाएंगे।

एलएमआरसी के सीनियर पीआरओ अमित कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि देश में अभी तक सबसे तेज मेट्रो निर्माण होने के कारण लखनऊ मेट्रो को पीआईबी का अनुमोदन विशिष्ट योग्यता के आधार पर मिला है।

सितंबर, 2014 से शुरू हुए सिविल इन्फ्रास्ट्रक्चर कार्यों की प्रगति बहुत शानदार है। मुख्य सचिव आलोक रंजन ने संकेत दिए हैं कि लखनऊ के बाद अब वाराणसी, कानपुर, आगरा और मेरठ में मेट्रो प्रोजेक्ट के लिए यूपी सरकार प्रयास तेज करेगी।
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स्टेशनों के निर्माण का भी आगाज

एलएंडटी सिविल निर्माण का कर रहा है। ट्रांसपोर्ट नगर से चारबाग तक हर जगह काम चल रहा है। कुल 460 यू गर्डर रखे जाने हैं, जिनमें से 50 यू गर्डर अब तक रखे जा चुके हैं। जबकि, पीयर कैप रखे जाने का काम भी तेजी से किया जा रहा है।

मेट्रो डिपो निर्माण को लेकर भी दावा है कि वह काम भी अपेक्षाकृत अच्छा चल रहा है। सितंबर-2016 तक काम खत्म हो जाएगा।रंग लाया छह माह का संघर्ष
पीआईबी स्वीकृति के लिए करीब छह महीने से जारी राज्य सरकार का संघर्ष पूरा हो गया।

ट्रांसपोर्ट नगर से मुंशीपुलिया तक करीब 22 किलोमीटर के इस रूट पर कुल खर्च करीब 6800 करोड़ रुपये का होगा। डीएमआरसी की ही तरह जो वित्तीय व्यवस्था लखनऊ मेट्रो के लिए है, उसमें कुल बजट 6800 करोड़ का 20 फीसदी राज्य सरकार, 20 फीसदी केंद्र सरकार और बकाया 60 फीसदी विदेशी ऋण के जरिये जुटाया जाएगा।

जिसमें राज्य और केंद्र सरकार करीब 1350-1350 करोड़ खर्च करेंगे। बकाया करीब 4100 करोड़ रुपये विदेशी ऋण से जुटाए जाएंगे। राज्य सरकार अपने हिस्से के लगभग 1000 करोड़ रुपये देने का एलान पहले ही कर चुकी है।

जबकि, केंद्र सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष में 100 करोड़ और चालू वित्तीय वर्ष के लिए लगभग 173 करोड़ रुपये देने का एलान किया है।
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