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सीएमए में लखनऊ के होनहारों का लहराया परचम, राजधानी को मिले नौ कॉस्ट अकाउंटेंट

Mon, 27 Aug 2018 02:54 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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सीएमए में कामयाब होने वाले होनहार। - फोटो : amar ujala
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द इंस्टीट्यूट ऑफ कॉस्ट अकाउंटेंट ऑफ इंडिया ने शनिवार को अपना रिजल्ट जारी कर दिया। परीक्षा पास करके राजधानी के नौ मेधावियों ने सीएमए की उपाधि हासिल की। राजधानी में सीएमए फाइनल का रिजल्ट 16 फीसदी, इंटरमीडिएट का 11 और फाउंडेशन का 67 फीसदी रहा। परीक्षा में सीए सागर त्रिपाठी ने चार्टर्ड अकाउंटेंट और कंपनी सेक्रेटरी के बाद सीएमए की उपाधि हासिल की है।
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सीएमए हिमेंद्र सोनी ने बताया कि फाइनल में इस साल 193 अभ्यर्थी बैठे थे। इनमें 31 पास हुए। इंटरमीडिएट में 334 में से 38 अभ्यर्थी सफल हुए। जबकि फाउंडेशन में 98 में से 66 अभ्यर्थियों ने सफलता हासिल की। बीते वर्ष के मुकाबले फाइनल का रिजल्ट 7 फीसदी अधिक है। इंटरमीडिएट का रिजल्ट पिछले साल 9 फीसदी और फाउंडेशन का 56 फीसदी रहा था।

धैर्य और कड़ी मेहनत से मिली सफलता

शिवानी और सोनी - फोटो : amar ujala
सीएमए का रिजल्ट बेहद कम रहता है। इसलिए कड़ी मेहनत के साथ ही धैर्य भी बेहद जरूरी था। मैंने दोनों पर विशेष ध्यान दिया। सीएमए की प्रेरणा मुझे अपने चाचा हेमंत कुमार सेे मिली। सफलता में मेरे पिता केके खरे और मां ममता खरे का योगदान सबसे अहम है।
- शिवानी शुभांगी

जितना पढ़ें, ठोस पढ़ें
सीएमए का कोर्स बहुत ज्यादा होता है। इसलिए जरूरी है कि जितना पढ़ा जाए उसे अच्छी तरह से तैयार किया जाए। मेरे पिता मंशा राम तिवारी की इसी साल फरवरी में मृत्यु हो गई है। ये सफलता उनके साथ ही अपनी मां लज्जा तिवारी को समर्पित करना चाहती हूं।
- सोनी तिवारी

सीए, सीएस और अब सीएमए

सागर और घनश्याम - फोटो : amar ujala
फाइनेंस फील्ड में आपको हमेशा अपडेट रहना होता है। इसलिए मैं हमेशा पढ़ता रहता हूं। वर्ष 2012 में सीए बनने के बाद प्रैक्टिस कर रहा हूं। इसके साथ ही वर्ष 2013 में सीएस और एलएलबी की परीक्षा पास की थी। जूनियर्स को सलाह है कि वे बेसिक पर सबसे ज्यादा ध्यान दें। 
- सागर त्रिपाठी

धैर्य और कड़ी मेहनत ही मंत्र
सीएमए में सफलता हासिल करने के लिए कोई शार्टकट नहीं होता। इसके लिए कड़ी मेहनत और धैर्य बहुत जरूरी है। पढ़ाई के लिए मैंने सेल्फ स्टडी का सहारा लिया। मेरे पिता विनय कुमार सरकारी से सेवानिवृत्त हैं, जबकि मां सुषमा देवी गृहिणी हैं। 
- घनश्याम प्रजापति

पिता ने गली-गली कपड़े बेचकर मुझे पढ़ाया

अमन और तान्या - फोटो : amar ujala
सीएमए में सफलता हासिल करने के लिए टाइम मैनेजमेंट बहुत जरूरी है। नोट्स तैयार करने से परीक्षा से पहले रिवीजन करना बेहद जरूरी होता है। पिता ने फेरी लगाकर गली-गली कपड़े बेंचकर मुझे पढ़ाया है। अपनी सफलता का श्रेय मैं अपने पिता प्रदीप गुप्ता और मां मधु गुप्ता को देना चाहता हूं।
-अमन गुप्ता

रिवीजन पर दें विशेष ध्यान
रिवीजन बहुत जरूरी होता है। परीक्षा होने तक रोजाना औसतन चार घंटे पढ़ाई करती थी, लेकिन जितना पढ़ती थी पूरे फोकस के साथ। इस सफलता का श्रेय मां-मीना जोशी, पिता-दयाकिशन जोशी के साथ ही दादा-कृष्णानंद जोशी और दादी हेमा को है।
- तान्या जोशी
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बॉक्सिंग में भी रहा चैंपियन

मो. तलहा और महेश - फोटो : amar ujala
राष्ट्रीय स्तर पर बॉक्सिंग के मेडल जीतने के बाद मेरा मकसद फाइनेंस फील्ड में अपना मुकाम बनाना था। आज परीक्षा पास करने के बाद मेरा मकसद पूरा हो गया है। अब मैं खुद की प्रैक्टिस करना चाहता हूं। मेरे पिता अब्दुल रशीद बिजनेसमैन और मां जोरा गृहिणी हैं।
- मो. तलहा

मॉडल टेस्ट पेपर बने मददगार
परीक्षा की तैयारी में मॉडल टेस्ट पेपर हल करने से मुझे सबसे ज्यादा मदद मिली। परीक्षा में सफलता के लिए कोर्स और टॉपिक पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। मेरी मां खीमा देवी ने परीक्षा की तैयारी करने में मुझे बहुत सहायता की। अपने पिता गुमान सिंह से मैंने अनुशासन सीखा।
- महेश सिंह
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