आंकड़ों की सबसे अहम बात यह है कि सीतापुर में मलेरिया का बड़ा प्रसार है, जबकि लखनऊ जिले में डेंगू के मामले ज्यादा हैं। राजधानी में 212 मलेरिया मरीजों के मुकाबले 98 डेंगू मरीज मिले हैं। वहीं, सीतापुर में 563 मलेरिया के मुकाबले डेंगू के सिर्फ नौ मामले हैं। इससे साफ है कि मच्छरजनित बीमारियों का असर पूरे मंडल में एक जैसा नहीं है और जिलेवार निगरानी जरूरी है।
बारिश में बुखार को न करें नजरअंदाज, कराएं जांच
बलरामपुर अस्पताल के निदेशक डॉ. बीकेएस चौहान का कहना है कि बारिश और उमस में घरों, छतों, कूलर, गमलों और खाली प्लॉटों में जमा पानी मच्छरों के पनपने की वजह बनता है। ऐसे मौसम में हर बुखार को सामान्य वायरल समझकर खुद से दवा लेना ठीक नहीं है। तेज बुखार के साथ सिरदर्द, बदन या पेट दर्द, बार-बार उल्टी, खून आना या बहुत ज्यादा कमजोरी हो तो फौरन जांच करानी चाहिए।
शहरों में डेंगू तो गांवों में मलेरिया के मामले ज्यादा
लखनऊ के जिला मलेरिया अधिकारी डॉ. रितु श्रीवास्तव का कहना है कि डेंगू आमतौर पर शहरों में ज्यादा फैलता है, जबकि मलेरिया के मामले ग्रामीण इलाकों में अधिक मिलते हैं। राजधानी होने के कारण आसपास के जिलों से इलाज के लिए आने वाले डेंगू मरीज भी लखनऊ के आंकड़ों में जुड़ते हैं। यहां सरकारी और निजी क्षेत्र की 26 लैब में एलाइजा जांच की सुविधा है। बेहतर निगरानी और जांच के कारण भी लखनऊ में डेंगू के मामले दूसरे जिलों की तुलना में ज्यादा सामने आते हैं।