लखऊ में समस्या बन चुके प्लास्टिक के कचरे का इस्तेमाल अब सस्ता डीजल बनाने में होगा। इसके लिए पीपीपी मॉडल पर जल निगम निजी कंपनी से प्रोसेसिंग यूनिट लगवाएगा। प्रोजेक्ट पर करीब 100 करोड़ रुपये के निवेश का अनुमान है।
शुरुआती आकलन के मुताबिक प्लास्टिक से बनने वाला डीजल बाजार से करीब 30 प्रतिशत तक कम कीमत में बिकेगा। जल निगम की सीएंडडीएस इकाई लखनऊ नगर निगम के साथ प्लास्टिक कचरे से ईंधन बनाने के प्रोजेक्ट पर काम कर रही है।
जल निगम ने कंपनी की तलाश शुरू कर दी है। जुलाई की शुरुआत में इसे फाइनल कर लिया जाएगा। वहीं, नगर निगम के साथ मिलकर जमीन की तलाश भी शुरू हो गई है। नगर निगम प्लास्टिक कचरे से डीजल बनाने का प्लांट लगाने को करीब पांच एकड़ जमीन देगा। यह कंपनी को एक रुपये प्रति वर्ग मीटर सालाना की लीज पर दी जाएगी।
जल निगम की शर्तों के मुताबिक प्लास्टिक के कचरे से डीजल बनाने के प्रोजेक्ट को 30 साल के लिए पीपीपी मॉडल पर कंपनी को दिया जाएगा। कंपनी फाइनेंस, डिजाइन, कंस्ट्रक्ट, ऑपरेट, मेंटेन, ट्रांसफर के मॉडल पर काम करेगी।
20,000 लीटर डीजल बनेगा रोजाना
- फोटो : डेमो
प्लांट लगाने का काम खुद कंपनी अपने खर्च पर करेगी। नगर निगम केवल अपने ट्रांसफर स्टेशन और दूसरे कलेक्शन सेंटर्स से प्लास्टिक वेस्ट उठाने के अधिकार कंपनी को देगा। जल निगम के प्रोजेक्ट के मुताबिक चयनित कंपनी 40 टन प्रतिदिन की क्षमता का प्रोसेसिंग प्लांट लगाएगी।
इससे करीब 20,000 लीटर डीजल का रोजाना उत्पादन होगा। इसे मार्केट में करीब 40 रुपये प्रति लीटर में बेचा जा सकेगा। इसका उपयोग वाहनों और दूसरी मशीनों में किया जा सकेगा। नगर निगम और जल निगम ने खुद चेन्नई में चल रहे इसी तरह के प्लांट के अध्ययन के बाद इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया है।
सीएंडडीएस के अधिकारियों का कहना है कि लखनऊ में करीब 80 टन प्लास्टिक कचरा रोजाना निकल रहा है। ऐसे में जरूरत होने पर प्लांट की क्षमता को बढ़ाना भी पड़ सकता है। लेकिन, इस प्रोजेक्ट का एक हिस्सा लोगों को प्लास्टिक कचरा न्यूनतम पैदा करने के लिए जागरूक करना भी होगा।
जल निगम का उद्देश्य प्लास्टिक से कमाई करने की जगह इस कचरे की समस्या का निदान करना है। प्लास्टिक कचरा से डीजल बनाने के लिए कंपनी अपने खुद के कलेक्शन सेंटर्स पूरे शहर में बनाएगी। इसमें स्रोत जैसे घर, दुकान, शोरूम, होटल, धार्मिक स्थल पर ही प्लास्टिक के कचरे को सामान्य कूड़ा से अलग कराया जाएगा। इस कचरे को उठाकर कलेक्शन सेंटर पहुंचाने वाले रैग पिकर्स और दूसरे लोगों की कमाई भी कंपनी कराएगी।
यहां देखें, प्लास्टिक के कचरे से नुकसान
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प्लास्टिक के कचरे से नुकसान
- ड्रेनेज, सीवरेज सिस्टम चोक हो रहा।
- गाय व दूसरे जानवर पॉलीथिन खाने से मर रहे।
- जलाए जाने पर वायु प्रदूषण बढ़ रहा।
- मिट्टी, नदी में भी प्रदूषण का कारण बनी प्लास्टिक।
जीरो वेस्ट पॉलिसी पर करेंगे काम
प्लास्टिक का कचरा आज के समय में भस्मासुर बन गया है। इसे हमने अपने आराम के लिए पैदा किया। अब यह हमारे लिए ही मुसीबत बन गया है। इसका समय रहते 100 प्रतिशत निस्तारण जरूरी है। हम जीरो वेस्ट पॉलिसी पर काम करेंगे। प्लास्टिक कचरा पूरी तरह शहर से खत्म किया जाएगा। इसके लिए नगर निगम के सहयोग से ही काम होना है। - आरएन गोयल, जीएम, सीएंडडीएस, जल निगम