प्रदेश में नए मेडिकल कॉलेजों के खुलने से स्वास्थ्य सुविधाओं में बढ़ोतरी हुई है। साथ ही एमबीबीएस की 3588 और पीजी की 804 सीटें बढ़ गई हैं। इससे अब अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की कमी दूर हो सकेगी और मेडिकल कॉलेजों में करीब तीन हजार बेड भी बढ़ाए गए हैं।
वर्ष 2017 के बाद सरकारी और निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और पीजी की 4592 सीटें बढ़ीं तो एम्स रायबरेली और गोरखपुर में 100-100 छात्रों को एमबीबीएस में प्रवेश दिया गया है। वर्ष 2017 से पहले सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की 1840 सीटें थीं, जो अब 3828 हो गई हैं। इसी तरह निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटें 2550 से बढ़कर 4150 हो गई हैं। इसी तरह वर्ष 2017 तक पीजी की 741 सीटें थीं जो अब बढ़कर 1027 हो गई हैं। निजी मेडिकल कॉलेजों में भी पीजी की सीटें 603 से बढ़कर 1064 हो गई हैं । सुपर स्पेशियलिटी में डीएम और एमसीएच की सीटें 120 से 177 हो गईं।
6165 से अधिक लोगों को मिला रोजगार
प्रदेश में नौ मेडिकल कॉलेजों के शुरू होने से करीब 6165 लोगों को रोजगार मिला है। इसमें 459 फैकल्टी, 216 सीनियर रेजिडेंट, 402 जूनियर रेजिडेंट तैनात किए गए हैं। हर मेडिकल कॉलेज में 460 पैरा मेडिकल स्टॉफ और 225 नर्सिंग स्टाफ की तैनाती की गई है। नए मेडिकल कॉलेजों से तमाम लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार मिला है। चिकित्सा शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार ने बताया कि नौ नए मेडिकल कॉलेजों में 90 फीसदी से अधिक फैकल्टी को रख लिया गया है। साथ ही शत प्रतिशत रेजिडेंट डॉक्टरों की नियुक्ति की गई है।
लगातार बढ़ रही मेडिकल कॉलेजों की संख्या
प्रदेश में 2017 के पहले तक 17 सरकारी मेडिकल कॉलेज थे, जिनकी संख्या 33 हो गई है। 25 अक्तूबर को नौ नए मेडिकल कॉलेजों का लोकार्पण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करेंगे। इसी तरह वर्ष 2022-23 में 14 नए मेडिकल कॉलेज भी शुरू होंगे। अमेठी, औरैया, बिजनौर, बुलंदशहर, चंदौली, गोंडा, कानपुर देहात, कौशाम्बी, कुशीनगर, लखीमपुर खीरी, ललितपुर, पीलीभीत, सोनभद्र और सुल्तानपुर में निर्माण चल रहा है। 16 शेष जिलों में पीपीपी मॉडल पर मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए पांच नवंबर तक आवेदन मांगे गए हैं।