कोरोना महामारी की दूसरी लहर के दौरान प्रदेश स्तर पर पोर्टल बनाकर मरीजों की भर्ती व्यवस्था दुरुस्त रखने के लिए रेफरल पॉलिसी बनाई गई थी। इससे सभी को यह पता रहता था कि किस अस्पताल में कितने मरीज भर्ती हैं और वहां कितने बेड खाली हैं। गंभीर मरीजों के मामले में भी यह पॉलिसी बनने पर सभी को इलाज मिल सकेगा।
हाईकोर्ट ने रेफरल प्रणाली का मांगा रोडमैप
हाईकोर्ट ने एक नवजात की मृत्यु के मामले में राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि बिना बेड कंफर्म किए गंभीर मरीजों को एक से दूसरे अस्पताल भेजना गैरजिम्मेदाराना रवैया है। कोर्ट ने सरकार से एडवांस लाइफ सपोर्ट एंबुलेंस बढ़ाने और एक मजबूत ऑनलाइन रेफरल प्रणाली का पूरा रोडमैप तलब किया है।
रेफरल ऑडिट कमेटी बने, जवाबदेही तय हो
केजीएमयू ट्रॉमा सेंटर के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. प्रेमराज सिंह का कहना है कि रेफरल व्यवस्था सुधारने के लिए तीन स्तरों पर काम जरूरी है। राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम बनाकर एंबुलेंस, जिला अस्पताल और मेडिकल कॉलेजों को एक सिस्टम से जोड़ा जाए। हर जिले में रेफरल ऑडिट कमेटी बनाई जाए, जो मरीजों को रेफर करने के कारण और जरूरत की जांच करे। जिला अस्पतालों में क्रिटिकल केयर और जरूरी विशेषज्ञ बढ़ाए जाएं, ताकि मरीजों को बिना जरूरत के बड़े अस्पतालों में रेफर करने की स्थिति में कमी आए।