जरा सी चूक से चारबाग में भी प्रतापगढ़ जैसा अग्निकांड हो सकता है। यहां गली-गली में मानकों को ताक पर रखकर होटल चल रहे हैं। इन होटलों में आग से बचने के कोई इंतजाम नहीं है।
विज्ञापन
इमरजेंसी में इन होटल से यात्रियों का बाहर आना मुश्किल है। ज्यादातर होटल इतनी तंग गलियों में हैं कि अग्निकांड के वक्त फायर ब्रिगेड घटनास्थल तक नहीं पहुंच पाती है। बीते कुछ वर्षों के दौरान लोगों ने अपने घरों को भी होटल में बदल दिया है।
कई पुराने घर तोड़कर होटल बनाए जा रहे हैं। कई होटल मालिकों ने बेसमेंट और पार्किंग तक में कमरे बनवा दिए हैं। जिला प्रशासन, फायर और होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन के पदाधिकारियों की चेतावनी के बावजूद यह होटल खुलेआम चल रहे हैं।
विज्ञापन
चारबाग के ज्यादातर होटलों की ऊंचाई कम है। नियमों के मुताबिक, 15 मीटर से अधिक ऊंचाई की बिल्डिंग को ही फायर विभाग नोटिस जारी कर सकता है, लेकिन 200 से अधिक होटल की ऊंचाई निर्धारित मानक से कम है।
कहीं नहीं हैं आग से बचाव के इंतजाम
चीफ फायर अफसर अभय भान पांडेय कहते हैं कि ऐसी बिल्डिंगों में आग से बचाव के इंतजाम की जिम्मेदारी होटल मालिक की है। वक्त-वक्त पर जागरूकता कार्यक्रम चलाते हैं। ऐसे होटल मालिकों को प्रशासन द्वारा पत्र जारी किए गए हैं।
नाका थाना के सामने बीते दिनों एक फैक्ट्री में आग लगने के बाद फायर विभाग ने इलाके के 30 होटलों का सर्वे कराया था।
चीफ फायर अफसर ने बताया कि किसी में भी आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम नहीं मिले। इसके बाद सभी होटल मालिकों को व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए गए हैं। चीफ फायर अफसर ने कहा कि हमने अपनी तरफ से बचाव के सारे इंतजाम किए हैं।
तंग गलियां जहां दमकल नहीं जा सकती, वहां के लिए बाइक तैयार हैं।
फायर एनओसी बिना संचालित होटल-रेस्टोरेंट पर पड़ेगा ताला
नोटिस के बावजूद बिना फायर एनओसी के चल रहे होटल व रेस्टोरेंटों पर जल्द ही ताला पड़ेगा। प्रतापगढ़ में होटल में लगी आग से हुए दर्दनाक हादसे के बाद चेते प्रशासन ने कार्रवाई में सुस्ती बरतने पर अग्नि शमन विभाग के जिम्मेदारों को फटकार लगाते हुए धारा 4 व धारा 7 के तहत त्वरित कार्रवाई कर ऐसे प्रतिष्ठानों को बंद करवाने का निर्देश दिया है।
एडीएम पूर्वी निधि श्रीवास्तव ने अग्निशमन विभाग द्वारा जारी नोटिस के बाद भी फायर एनओसी न लेने वाले ऐसे दो दर्जन प्रतिष्ठानों के खिलाफ कार्रवाई न किए जाने पर चीफ फायर आफिसर से नाराजगी जताई।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी को निर्देश दिया गया है कि नाका व कैसरबाग थानाक्षेत्र के तहत चारबाग, पानदरीबा, लाटूश रोड, राजेंद्र नगर व कैसरबाग इलाके में आवासीय क्षेत्र के बीच बिना फायर एनओसी संचालित करीब डेढ़ दर्जन होटल रेस्टोरेंट का संचालन बंद कराने को धारा 4 व 7 के तहत कार्रवाई करें और अंतिम रिपोर्ट शीघ्र सौंपे।
होटल एंड रेस्टोरेंट एसोसिएशन लखनऊ के अध्यक्ष राजेश्वर अग्रवाल बताते हैं कि चारबाग रेलवे स्टेशन से पुराना बस अड्डा, पान दरीबा, सुदर्शन टॉकीज लेन, गुरुनानक मार्केट, गुरुद्वारा रोड, सब्जी मंडी, आर्यनगर लुकमानगंज, विजयनगर, ऐशबाग रोड पर डीएवी कॉलेज के आसपास और नाका हिंडोला में करीब 250 होटल खुले हैं।
इसमें मात्र 50 ही रजिस्टर्ड हैं। 200 होटल में मानकों का पालन नहीं हो रहा है। नियम है कि होटल के हर फ्लोर पर अग्निशमन यंत्र और फायर पाइप होने चाहिए, लेकिन कुछ बड़े होटलों को छोड़ दें तो किसी के पास न अग्निशमन यंत्र हैं न ही फायर पाइप।
सीढ़ियां इतनी संकरी हैं कि आग लगने पर चौथी-पांचवीं मंजिल से तत्काल नीचे आना संभव नहीं है। तंग गलियों के चलते फायर ब्रिगेड की गाड़ियां भीतर नहीं आ सकतीं। बचाव कार्य के लिए होटलों के आसपास खाली स्थान भी नहीं है।