इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने आपराधिक मामलों में प्रस्तुत की जाने वाली अस्पष्ट मेडिकल रिपोर्ट पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने कहा कि पोस्टमार्टम व घायलों की चोट से जुड़ी ऐसी डॉक्टरी रिपोर्ट कोर्ट में प्रस्तुत की जानी चाहिए, जो पूरी तरह पठनीय हो।
न्यायमूर्ति बृजराज सिंह की एकल पीठ ने यह आदेश देते हुए प्रमुख सचिव, स्वास्थ्य को निर्देशित किया कि वह प्रदेश के सभी जिलों के सीएमओ को पोस्टमार्टम रिपोर्ट व घायलों की चोटों की रिपोर्ट टाइप फार्मेट में बनवाने के लिए आदेशित करें।
हरदोई जिले से जुड़े एक गैर इरादातन हत्या के मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने आदेश के पालन की निगरानी के लिए केस को अगली सुनवाई 25 मई को तय की है। एकल पीठ आरोपी विश्वनाथ की जमानत अर्जी पर सुनवाई कर रही थी।
कोर्ट ने सह अभियुक्त की जमानत पहले ही मंजूर हो जाने के कारण समानता के आधार पर आरोपी की भी जमानत मंजूर कर दी। इस दौरान जब कोर्ट ने मृतक की चोटों के बारे में पूछा तो सरकारी वकील राजेश कुमार सिंह ने बताया कि रिपोर्ट में चोटों का विवरण पढ़ने में नही आ रहा है।
अदालत ने भी पाया कि डाक्टर द्वारा अस्पष्ट लिखावट में चोटें दर्ज की गई हैं। जबकि रिपोर्ट पर दर्ज इन्हीं चोटों से ही अपराध की गंभीरता, आरोपी की अपराध भूमिका व संलिप्तता का आंकलन किया जाता है। रिपोर्ट के अस्पष्ट व अपठनीय होने से सही स्थिति पता नहीं चल पाती है।