भूकंप से दहली राजधानी को 81 साल बाद इतने तगड़े झटके लगे। इससे पहले 1934 में बिहार में आए जबरदस्त भूकंप से लखनऊ हिल गया था। तब बिहार में दोपहर करीब 2:13 बजे 8.2 तीव्रता का भूकंप आया था।
इससे जान-माल का भारी नुकसान हुआ था। शनिवार को भी राजधानी की जमीं तीन झटकों से थर्रा गई। ये भूकंप के बाद (आफ्टरशॉक) आने वाले झटके हैं। इसलिए अगले छह महीने तक ऐसे झटकों के आने की आशंका बनी रहेगी।
यह जानकारी अलीगंज स्थित जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (जीएसआई) में भूकंप सेल के निदेशक केसी जोशी ने दी। उन्हें उत्तरभारत में भूकंप से हुई तबाही के आंकलन के लिए जीएसआई की टीम में शामिल किया गया है।
जीएसआई उत्तरी क्षेत्र के महानिदेशक सिद्घार्थ स्वरूप ने बताया कि टीम मैक्रो सीसमिक सर्वे कर भूकम्प के ट्रेंड पर रिपोर्ट तैयार करेगी। उन्होंने अमर उजाला से बातचीत में बताया कि धरती को पांच सीसमिक जोन में बांटा गया है।