हादसे में जान गंवाने वाली उजमा का सात साल का बेटा भी घायल हो गया है। उसे भी सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसके पैर और सीने में चोटें आई हैं। अस्पताल में भर्ती मासूम मुस्तफा बार-बार मां को आवाज दे रहा था। घरवाले उसे यह कहकर बहला रहे थे कि मां चॉकलेट लेने गई है।
लखनऊ में जमींदोज हुए अलाया अपार्टमेंट के मलबे में दबीं सपा प्रवक्ता की मां और पत्नी को बुधवार सुबह रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। परिजन बगैर पोस्टमार्टम कराए शव लेकर चले गए। उधर, हजरतगंज पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर सपा के पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर के बेटे नवाजिश शाहिद को गिरफ्तार कर लिया।
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कोर्ट ने आरोपी को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजा है। दो अन्य आरोपियों की तलाश के लिए पांच टीमें बनाई गईं हैं। रेस्क्यू ऑपरेशन अभी भी जारी है। शासन ने प्रकरण की जांच के लिए मंडलायुक्त की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की है।
वजीर हसन रोड स्थित पांच मंजिला अलाया अपार्टमेंट मंगलवार शाम करीब साढ़े छह बजे ढह गया था। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, दमकल और पुलिस के जवान रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाए गए थे। सोमवार देर रात तक टीमों ने 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाल लिया था।
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राहत बचाव कार्य लगातार जारी था। बुधवार सुबह चार और लोगों को बाहर निकाला गया। इसमें से सपा प्रवक्ता अब्बास हैदर की मां बेगम आमिर हैदर (72) व उनकी पत्नी उजमा हैदर (35) को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।
मां को बुलाता रहा मासूम मुस्तफा
हादसे में जान गंवाने वाली उजमा का सात साल का बेटा भी घायल हो गया है। उसे भी सिविल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उसके पैर और सीने में चोटें आई हैं। मुस्तफा और उसके दादा को मंगलवार शाम ही मलबे से निकाल लिया गया था। मां और दादी बुधवार सुबह तक मलबे में फंसी रहीं।
सुबह जब उन्हें मलबे से निकालकर अस्पताल भेजा गया तो डॉक्टरों ने उन्हें मृत बताया। अस्पताल में भर्ती मासूम मुस्तफा बार-बार मां को आवाज दे रहा था। घरवाले उसे यह कहकर बहला रहे थे कि मां चॉकलेट लेने गई है। यह देख सभी की आंखें नम हो गईं।
पोस्टमार्टम न कराने को लेकर पुलिस से भिड़ा परिवार
सपा नेता अब्बास हैदर के परिवार ने उजमा और उनकी सास बेगम आमिर हैदर की मौत के बाद सिविल अस्पताल में हंगामा किया। उन्होंने प्रशासन पर लापरवाही और बदइंतजामी का आरोप लगाया। अब्बास हैदर ने रेस्क्यू के नाम पर तमाशा करने का आरोप लगाया। उनके अनुसार कहे गए स्थान पर ड्रिल नहीं की जा रही थी।
मलबे पर खड़े होकर सभी फोटो खिंचवा रहे थे। तकनीकी विशेषज्ञ न होने की वजह से राहत कार्य में इतनी देरी हुई। इसके बाद उनका परिवार दोनों मृतकों के पोस्टमार्टम न कराने की मांग पर अड़ गया। इसे लेकर पुलिस कहासुनी भी हुई। हालांकि, बाद में पंचनामा व लिखित में पत्र लेकर शव बिना पोस्टमार्टम कराए सौंप दिए गए।
एक सप्ताह में रिपोर्ट देगी जांच कमेटी
शासन ने सीएम के आदेश पर जांच कमेटी गठित की है। इसमें मंडलायुक्त रोशन जैकब, ज्वॉइंट पुलिस कमिश्नर पीयूष मोर्डिया और पीडब्ल्यूडी के चीफ इंजीनियर शामिल हैं। एक सप्ताह में जांच कमेटी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी।
मलबा हटाने में लग सकते हैं 24-48 घंटे
पुलिस कमिश्नर ने बताया कि अब मलबा हटाने का कार्य तेजी से शुरू किया गया है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीम व उनके अधिकारियों की मॉनिटरिंग में कार्य जारी है। इसमें 24 से 48 घंटे का समय लग सकता है। एनडीआरएफ के अफसरों का कहना है कि हम यही मानकर कर चल रहे हैं कि शायद कोई दबा हो। इसलिए राहत-बचाव कार्य जारी है। हालांकि इसकी उम्मीद न के बराबर है।