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अलाया अपार्टमेंट हादसा: लाइव सेंसर की मदद से मलबे में दबे लोगों को खोजा, 360 डिग्री पर घूमते हैं कैमरे

Thu, 26 Jan 2023 11:29 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, लखनऊ

सार

अवैध अलाया अपार्टमेंट पर नगर निगम भी कम मेहरबान नहीं रहा है। अपार्टमेंट से एक सपा नेता का नाम जुड़ा है। ऐसे में नगर निगम ने भी 12 सालों से इससे टैक्स नहीं वसूला है। इतना ही नहीं जिन्हें फ्लैट बेचे गए, इसकी जानकारी भी नहीं दी गई है। कुल 12 में से 11 फ्लैट अब तक अलाया अपार्टमेंट के नाम पर ही नगर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज हैं। 
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Lucknow Building Collapse - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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लखनऊ के अयाला अपार्टमेंट हादसे में हाईटेक तकनीक की मदद से लोगों को बचाने में मदद मिली। एनडीआरएफ के कमांडेंट एमके शर्मा ने बताया कि लाइव सेंसर से पता चल जाता है कि किसी बंद जगह पर कोई इंसान है या नहीं। इस कारण सबसे पहले मलबे में छेद कर-कर इन सेंसर को लटकाया गया। 
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इसके बाद जहां लोगों के होने की पुष्टि हुई, वहां विक्टिम लोकेशन (वीएल) कैमरे लटकाए गए, जो 360 डिग्री पर घूमते हैं। इससे फंसे लोगों की लोकेशन पता चलने के बाद छत की स्लैब काटकर लोगों को निकाल लिया गया।

रेस्क्यू में एनडीआरएफ की कुल चार टीमें लगी हैं, जिनमें 140 जवान हैं। एसडीआरएफ की चार टीमों में 200 जवान हैं। इसी तरह पुलिस के करीब 200 और 150 दमकलकर्मियों ने मोर्चा संभाला। सभी विभागों के अफसरों की निगरानी में पूरा ऑपरेशन चला। अयोध्या, हरदोई, उन्नाव, सीतापुर व रायबरेली से भी दमकल बुलाई गई। टीमों को शिफ्ट से ऑपरेशन में लगाया गया।
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अलाया अपार्टमेंट के 12 में से 11 फ्लैट अब भी बिल्डरके नाम दर्ज
अवैध अलाया अपार्टमेंट पर नगर निगम भी कम मेहरबान नहीं रहा है। अपार्टमेंट से एक सपा नेता का नाम जुड़ा है। ऐसे में नगर निगम ने भी 12 सालों से इससे टैक्स नहीं वसूला है। इतना ही नहीं जिन्हें फ्लैट बेचे गए, इसकी जानकारी भी नहीं दी गई है। कुल 12 में से 11 फ्लैट अब तक अलाया अपार्टमेंट के नाम पर ही नगर निगम के रिकॉर्ड में दर्ज हैं। 

सिर्फ एक फ्लैट डॉ. रिंकी किशोर के नाम पर है। मंगलवार को बिल्डिंग ढहने के बाद सुर्खियों में आए अलाया अपार्टमेंट को लेकर नगर निगम में रिकॉर्ड खंगाला गया। पता चला कि इसके फ्लैटों का सामान्य सर्वे के आधार पर वर्ष 2010 में गृहकर निर्धारण किया गया था, लेकिन अब तक किसी भी फ्लैटवाले ने टैक्स जमा नहीं किया। 
 

बिल्डर ने 12 फ्लैट किसे बेचे, इसका रिकॉर्ड भी नहीं है। सिर्फ एक खरीदार की ही जानकारी नगर निगम के रिकॉर्ड मेंं हैं। एक फ्लैट का सालाना हाउस टैक्स 3240 रुपये बनता है। 13 साल का टैक्स करीब सात लाख रुपये बनता है। 

 
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जोनल अधिकारी नरेंद्र वर्मा ने बताया कि आवासीय भवनों में बकाया टैक्स की वसूली को लेकर नोटिस ही दे सकते हैं, सीलिंग की कार्रवाई नहीं करते हैं। खरीदारों ने नामांतरण क्यों नहीं कराया, इस बारे में कुछ नहीं कह सकता। नामांतरण तभी होता है जब खरीदार आवेदन कर फीस जमा करता है।
 
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