प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों की रेफरल व्यवस्था को दुरुस्त करने की कवायद तेज कर दी गई है। पीएचसी, सीएचसी व जिला अस्पताल के डॉक्टर को मरीज रेफर करने से पहले कारण बताना होगा। उप मुख्यमंत्री के निर्देश के बाद स्वास्थ्य महानिदेशक ने सभी अस्पताल प्रभारियों को आदेश दिया है।
प्रदेश के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में आने वाले मरीजों को ज्यादातर डॉक्टर जिला अस्पताल रेफर कर देते हैं। इसी तरह जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को धड़ल्ले से चिकित्सा संस्थानों में रेफर कर दिया जाता है। चिकित्सा संस्थानों की इमरजेंसी में पड़ताल में यह बात सामने आई कि उनकी इमरजेंसी मेँ आने वाले करीब 30 फीसदी ऐसे मरीज होते हैं, जो जिला अस्पताल में आसानी से उपचारित किए जा सकते हैं।
इसी तरह जिला अस्पताल आने वाले 20 से 25 फीसदी मरीज को सीएचसी स्तर पर उपचार दिया जा सकता है। इस सर्वे रिपोर्ट के आधार पर उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को रेफरल व्यवस्था दुरुस्त करने का निर्देश दिया है। यह तय किया गया है कि मरीज को उच्च अस्पातल पर रेफर करते वक्त यह बताना होगा कि वहां संबंधित बीमारी के इलाज में कौन सी सुविधाएं नहीं हैं। बेड भरे हैं तो यह भी बताना होगा कि कुल कितने मरीज भर्ती हैं। स्वास्थ्य महानिदेशक डा. वेदब्रत सिंह ने बताया कि सभी मुख्य चिकित्साधिकारियों एवं मुख्य चिकित्सा अधीक्षक को इस संबंध में निर्देश दे दिया गया है।
तैयार होगी भविष्य की रणनीति
पीएचसी, सीएचसी व जिला अस्पताल की रेफरल व्यवस्था लागू करने से संबंधित अस्पताल की जरूरत का भी अंदाजा लग सकेगा। स्वास्थ्य विभाग की रणनीति है कि भविष्य में रेफरल डाटा का मूल्यांकन किया जाएगा। किसी सीएचसी से सर्जरी के मरीज लगातार जिला अस्पताल रेफर हो रहे हैंतो वहां सर्जरी से जुड़े संसाधन बढ़ाए जाएंगे। इसी तरह यह भी पता चल सकेगा कि किस इलाके के अस्पताल से मरीज ज्यादा रेफर हो रहे हैं। ऐसे में चिक्तिसा संस्थानोंपर मरीजों का दवाब कम करने के लिए संबंधित क्षेत्र में उस विधा के उपचार की सुविधाएं बढ़वाई जाएंगी।