पूर्व कैबिनेट मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति
- फोटो : amar ujala
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने प्रदेश के पूर्व मंत्री गायत्री प्रसाद प्रजापति की जालसाजी व धोखाधड़ी के आरोपों वाले दो मामलों में सत्र अदालत से जमानत मंजूरी के आदेशों के अमल पर रोक लगा दी है। साथ ही कोर्ट ने राज्य सरकार की याचिका में पक्षकार गायत्री को नोटिस भी जारी की है। याचिका में जमानत मंजूरी को चुनौती दी गई है।
न्यायमूर्ति राजीव सिंह ने मंगलवार को यह आदेश राज्य सरकार की तरफ से सीआरपीसी की धारा 482 के तहत दायर याचिका पर दिया। सरकार के अपर महाधिवक्ता विनोद कुमार शाही के साथ सरकारी वकील अनुराग वर्मा की दलील थी कि सत्र अदालत ने जालसाजी, दुष्कर्म पीड़िता को पक्षद्रोही कराने को प्रलोभन देने आदि के आरोपों वाले दो मुकदमों में गायत्री की जमानत मंजूर की थी।
शाही ने कहा कि जमानत प्रक्त्रिस्या के दौरान गायत्री ने अपने खिलाफ सभी केसों का खुलासा नहीं किया इससे सत्र अदालत आरोपी गायत्री के आपराधिक इतिहास पर पूरी तरह गौर नहीं कर सकी। इस तरह दोनों मामलों में गायत्री की जमानत मंजूर हो गई। ऐसे में अदालती प्रक्त्रिस्या का दुरुपयोग कर प्राप्त किए गए दोनों जमानत मंजूरी के आदेश रद्द करने योग्य हैं। कोर्ट ने दोनों जमानत मंजूरी के आदेशों के अमल पर रोक लगाते हुए गायत्री को नोटिस जारी किया है। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 25 नवंबर को नियत की है।