कोर्ट ने 2022 में हुई इन नियुक्तियों को विधिक प्रावधानों के खिलाफ बताते हुए भर्ती बोर्ड को नया विज्ञापन जारी कर चयन प्रक्रिया पूरी कराने का आदेश दिया है।
इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने बुधवार को एक अहम फैसले में 2013 में जारी विज्ञापन के आधार पर सरकारी इंटर कॉलेजों में प्रधानाचार्यों की नियुक्तियों को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने 2022 में हुई इन नियुक्तियों को विधिक प्रावधानों के खिलाफ बताते हुए भर्ती बोर्ड को नया विज्ञापन जारी कर चयन प्रक्रिया पूरी कराने का आदेश दिया है।
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न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकल पीठ पूर्व में ही पैनल के तहत नियुक्ति पर यथा स्थिति बनाए रखने का आदेश देकर अपना निर्णय सुरक्षित कर चुकी थी। पीठ ने यह निर्णय 28 याचिकाओं का निस्तारण करते हुए एक साथ दिया। याचियों ने बताया कि भर्ती का विज्ञापन 2013 में जारी हुआ, लेकिन चयन वर्ष 2022 में किया गया।
ऐसे में नौ साल में बहुत से पात्र रिटायर हो गए और कई आवेदक अधिकतम आयु सीमा के पार हो गए। इससे इनकी वरिष्ठता व पात्रता बदल गई। इसलिए प्रधानाचार्यों के चयन को तैयार किया गया पैनल कानून की मंशा के अनुसार नहीं माना जा सकता है।