फसल अवशेष (पराली आदि) जलाए जाने से पर्यावरण संकट पर सुप्रीमकोर्ट की सख्ती का बड़ा असर सामने आया है। मुख्य सचिव ने 10 जिलों में 2027 स्थानों पर फसल अवशेष जलाए जाने का ब्योरा भेजते हुए वहां के जिलाधिकारियों से 20 नवंबर तक स्पष्टीकरण तलब किया है।
जिलाधिकारियों से इन घटनाओं के लिए जवाबदेह अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी मांगी है। अन्य जिलों के डीएम को पराली जलाई जाने की एक भी घटना न होने देने के लिए सख्त दिशानिर्देश जारी किए गए हैं।
मुख्य सचिव राजेंद्र कुमार तिवारी ने पराली जलाने से पैदा होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण से संबंधित सुप्रीमकोर्ट के आदेशों व इस संबंध में शासन स्तर से कार्यवाही के लिए जारी शासनादेशों का हवाला देते हुए जिलाधिकारियों को कड़ा पत्र लिखा है।
उन्होंने मथुरा, पीलीभीत, शाहजहांपुर, रामपुर, अलीगढ़, झांसी, लखमीपुर खीरी, महराजगंज, बरेली व जालौन में पराली जलाए जाने की घटनाओं का ब्योरा दिया है। साथ ही जिलाधिकारियों से उनका स्पष्टीकरण मांगने के साथ पूछा है कि उन्होंने इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ क्या कार्रवाई की है? संबंधित विभागों के अधिकारियों द्वारा अपने दायित्वों का निर्वहन क्यों नहीं किया गया?