भले ही सलमान खान की छवि फिल्म इंडस्ट्री और उनके चाहने वालों में ‘दबंग’ की है, पर न्याय और कानून की लड़ाई में उनके दांवपेंच काम नहीं आए। उनके हर जवाब का तोड़ निकाला लखनऊ की बेटी आभा सिंह ने।
सुल्तानपुर में जन्मीं और लखनऊ में पली-बढ़ीं मानवाधिकार कार्यकर्ता और वकील आभा ने फैसला आने के तुरंत बाद फोन पर ‘अमर उजाला’ से कहा, ‘यहां सवाल जीत या हार का नहीं, बल्कि न्याय और सच्चाई की जीत का है। अदालत का फैसला इस बात का पुख्ता सुबूत है कि कानून सुप्रीम था, है और रहेगा।
आभा कहती हैं-सच कहूं तो अंतरात्मा की आवाज पर इस केस से जुड़ गई। हमें यह साबित करना था कि कानून ही सुप्रीम है, इससे ऊपर कोई नहीं। 2 नवंबर 2012 को हमने मुंबई में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
एनआरआई ब्यूटीशियन नूरिया हवेलीवाला केस से जुड़े दस्तावेज इकट्ठा कर मीडिया के सामने रखे। अखबारों की कटिंग से लेकर अदालत के फैसले की कॉपी तक पेश की। हमारा मकसद लोगों को बताना और एक जनमत बनाना था कि जब हवेलीवाला को सजा हो सकती है तो सलमान दोषी कैसे नहीं? इसी केस को नजीर बनाकर हम अदालत में गए।
बॉडीगार्ड पर भारी पड़ी बॉडीगार्ड की गवाही
उस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद हाथ पर हाथ धरे बैठी बांद्रा पुलिस को कोर्ट ने नोटिस भेजा और पूछा कि इस केस में अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
इसके बाद 21 दिसंबर 2012 को बांद्रा पुलिस ने सलमान के खिलाफ गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज किया और मामला सेशन कोर्ट तक पहुंचा। हाई प्रोफाइल मामला होने के नाते एक-एक कर केस से जुड़े गवाह मुकरने लगे थे। हमने कोर्ट के समक्ष यह मामला उठाया।
लखनऊ में डाक विभाग की चीफ पोस्ट मास्टर जनरल रहीं आभा सिंह ने गरीबों को हक दिलाने के लिए 2 नवंबर 2012 को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सलमान के खिलाफ मोर्चा खोला। उनके साथ लड़ाई में उनके पति वाईपी सिंह भी उतरे। वे उस समय आईपीएस अफसर थे।
लखनऊ की बेटी आभा सिंह ने कहा- तमाम गवाहों के मुकर जाने और पीड़ितों के गायब हो जाने के बाद एकमात्र उम्मीद की किरण बची थी सलमान के बॉडीगार्ड रवींद्र पाटिल का बयान।
पाटिल ने कोर्ट के समक्ष दिए गए अपने बयान में कहा था कि सलमान 90-100 किलोमीटर की स्पीड से कार चला रहे थे और नशे में धुत थे, जबकि कलाम खान जो उस वक्त कार में मौजूद थे, विरोधाभासी बयान देकर विदेश निकल पड़े थे।
इस गलतबयानी ने भी कोर्ट के शक को पुख्ता किया। हमने कहा कि कलाम यदि बीमार हैं तो उन्हें बुलवाया जाए और यहां इलाज कराया जाए।
ड्राइवर के बयान ने हमें और मजबूत बनाया
सलमान के ड्राइवर अशोक सिंह ने कुछ दिन पहले यह स्वीकार किया कि कार अभिनेता नहीं, बल्कि खुद वह चला रहा था। इस दलील ने हमारा पक्ष तो मजबूत किया, लेकिन सलमान का केस जरूर कमजोर कर दिया।
हमने सवाल उठाया कि आखिर इतने वर्षों बाद ड्राइवर ने यह कैसे और क्यों स्वीकार किया? इससे सलमान के खिलाफ संदेह और गहरा हुआ। जहां तक इस केस में पुलिस की भूमिका का सवाल है तो वह सलमान खान के ग्लैमर के आगे नतमस्तक थी।
हमने कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि पुलिस से पूछा जाए कि आखिर उसने क्या किया। जब कोर्ट ने पुलिस पर नजरें टेढ़ी कीं और कहा कि क्यों न उस पर एक्शन लिया जाए तो कार्रवाई का दौर शुरू हो गया।
गरीबों में चाहे आप जितने भी करोड़ रुपये बांट दें (अदालत ने कहा कि सलमान ने 42 करोड़ रुपये गरीबों में बांटे), इससे कुछ नहीं होगा। गुनाह करने पर सजा मिलेगी ही। कानून को सुबूत चाहिए और इस केस में सब कुछ सलमान के खिलाफ था।
सभी ने कहा- आज अकेले वॉक पर मत जाना
अमूमन बड़े मामलों में टांग अड़ाना कोई नहीं चाहता। यही वजह है कि मंगलवार रात मुझसे सभी ने कहा कि छह मई को फैसले का दिन है। कुछ भी हो सकता है, इसलिए अकेले वॉक पर मत जाना। यह केस हाथ में लेते समय भी मुझे ऐसी ही सलाह दी गई थी। सच कहूं तो मुझे डर कभी नहीं लगा। मेरे सामने लक्ष्य था और मुझे अपना काम करना था।
भारतीय मूल की अमेरिकी ब्यूटीशियन नूरिया हवेलीवाला उस वक्त चर्चा में आई जब नशे में धुत होकर उसने जनवरी 2010 में छह लोगों पर एसयूवी चढ़ा दी थी। इनमें से दो की मौत हो गई थी और चार घायल हुए थे।
विशेष अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए नूरिया को नशे में धुत होकर गाड़ी चलाने, गैर इरादतन हत्या और नारकोटिक्स ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सबस्टेंसेस (एनडीपीसी) एक्ट का दोषी पाया था। नूरिया को पांच साल कैद की सजा सुनाई गई थी। यह फैसला दो साल में आ गया था। लेकिन सलमान केस में 13 साल लग गए।