अंसल के दिवालिया होने का मामला राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील अधिकरण (एनसीएलएटी) में है। इससे आम लोगों के साथ ही सरकारी विभागों को भी करोड़ों का झटका लगा है। अंसल के प्रोजेक्ट में एलडीए की तरह ही नगर निगम की करीब 55 हेक्टेयर जमीन फंस गई है। इसकी कीमत 800 करोड़ रुपये से अधिक होने का अनुमान है। जमीन वापस लेने के लिए नगर निगम की ओर से साल भर पहले जांच और पैमाइश को लेकर टीम बनाई गई थी, मगर हुआ कुछ नहीं।
शहीद पथ के पास अंसल प्रापर्टीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड की सुशांत गोल्फ सिटी हाईटेक टाउनशिप है। सीमा विस्तार के बाद नगर निगम में आए माढरमऊ कलां, सेनई, कंजेहरा, अहमामऊ, यूसुफनगर बगियामऊ, हरिहरपुर, देवामऊ, सेंवई, बरौना, मुजफ्फर नगर, घुसवल, निजामपुर मझिगवां, हसनपुर खेवली व घुसवल कलां गांव की जमीन इसी टाउनशिप के अंदर आ गई है। नगर निगम की स्वामित्व वाली चकमार्ग, ऊसर बंजर, तालाब आदि की करीब 55 हेक्टेयर से अधिक जमीन भी टाउनशिप के दायरे में है। इसकी जानकारी बिल्डर ने नगर निगम को नहीं दी और न ही अनुमति ली। बीते साल नोटिस जारी हुआ तो एक छोटी जमीन का विनियम करने का प्रस्ताव अंसल की ओर से नगर निगम के बजाए एसडीएम को दिया गया। इसे जांच के बाद नगर निगम ने अनुचित पाते हुए निरस्त भी कर दिया था। इसके बाद भी बिल्डर कंपनी ने न तो सरकारी जमीन से कब्जा छोड़ा और न ही विनिमय का नया प्रस्ताव नगर निगम को दिया।
अवैध रूप से किया सरकारी जमीन पर निर्माण
नगर निगम के शासनादेश के तहत यदि बिल्डर कंपनी की योजना के बीच सरकारी जमीन आती है तो उसका विनियम (जमीन के बदल जमीन का एक्सचेंज) किया जा सकता है। इसके लिए बिल्डर को पहले ही अनुमति लेनी होती है। फिर अलग-अलग सरकारी जमीन के बदल एक जगह उतनी ही कीमत की जमीन देनी होती है। आरोप है कि बिल्डर ने दिखावे के लिए कुछ जमीन का विनियम किया, बाकी पर अवैध रूप से कब्जा कर निर्माण कर लिया है।
सीमा विस्तार के बाद नगर निगम में आए गांव
अंसल के कब्जे वाली सरकारी जमीन को कब्जा मुक्त कराने के लिए उप जिलाधिकारी सरोजनी नगर की ओर से नगर आयुक्त को जो रिपोर्ट भेजी गई थी, उसमें कई गांवों की जमीन का उल्लेख है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरोजनी नगर तहसीलदार की जांच में सरकारी जमीन पर बिल्डर का कब्जा पाया गया है। सीमा विस्तार के बाद उक्त गांव नगर निगम सीमा में आ गए हैं, ऐसे में उनसे कब्जा हटाने की कार्रवाई नगर निगम से की जाए।
एक साल बाद भी पूरी नहीं हुई जांच
जांच के लिए एक साल पहले नगर निगम ने नायब तहसीलदार नीरज कटियार की अध्यक्षता में आठ सदस्यीय टीम बनाई थी। इसमें नायब तहसीलदार के अलावा लेखपाल अजीत तिवारी, राजेंद्र कुमार, राकेश यादव, सुधांशु श्रीवास्तव, विनोद कुमार वर्मा, नवोदित प्रताप सिंह व आनंद श्रीवास्तव शामिल हैं। एक साल बाद भी यह टीम जांच पूरी नहीं कर पाई है। इस बीच टीम के कई सदस्य भी बदल गए और जांच भी ठंडे बस्ते में है।