उत्तर प्रदेश में पहले चरण की हर सीट पर मतदान घटा। मुजफ्फरनगर, बिजनौर और रामपुर में मतदान काफी गिरा। इसकी वजह लू-गर्मी को माना जा रहा है। वहीं, सपा ने पुलिस-प्रशासन पर उसके समर्थक मतदाताओं को निकलने से रोकने का आरोप भी लगाया है।
पहले चरण के मतदान के आंकड़े शुक्रवार की देर रात तक आधिकारिक रूप से फाइनल नहीं हुए थे, लेकिन तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। वर्ष 2019 के मुकाबले मुजफ्फरनगर में करीब 9.92 प्रतिशत मतदान कम रहा। बताते हैं कि स्थानीय समीकरणों के चलते चौबीसी के मतदाताओं में नाराजगी थी और मान-मनौव्वल के बावजूद उनमें पहले जैसा उत्साह नहीं दिखा।
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इसके अलावा पश्चिमी यूपी में तापमान 40-42 डिग्री सेंटीग्रेड तक रहा। लू के थपेड़े भी चल रहे थे। माना जा रहा है कि तमाम पढ़े-लिखे लोगों ने इतनी गर्मी में बूथ तक जाने में रुचि नहीं ली।
रामपुर में 7.44 फीसदी मतदान कम हुआ। इसकी वजह आजम फैक्टर भी मानी जा रही है। जेल में बंद पूर्व कैबिनेट मंत्री आजम खां ने अखिलेश यादव के वहां से चुनाव न लड़ने से बहिष्कार का एलान किया था। हालांकि, सपा के स्थानीय नेताओं का आरोप है कि रामपुर में उसके समर्थक मतदाताओं को बूथ तक पहुंचने से रोका गया।
बिजनौर में भी करीब 8 फीसदी मतदान गिरा। वर्ष 2019 की तुलना में पीलीभीत में 3.71 प्रतिशत, मुरादाबाद में 3.42 प्रतिशत, सहारनपुर में 1.93 प्रतिशत, कैराना में 6.28 प्रतिशत और नगीना में 4.12 प्रतिशत मतदान कम रहा। मतदान कम होने से सियासी दलों को भी अपनी समीकरणों की गुणा-भाग करने में मुश्किलें आ रही हैं।