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देवीपाटन मंडल: दिग्गजों के बगैर हो रहा चुनावी रण, दो पूर्व सांसद जेलों में बंद, अब ऐसा है माहौल

Sun, 14 Apr 2024 04:24 PM IST
ishwar ashish संजय तिवारी, अमर उजाला, बलरामपुर

सार

देवीपाटन मंडल के अंतर्गत आने वाली सीटों से इस बार ये दिग्गज गायब हैं। ये माहौल को गर्माने का काम करते थे। चुनाव की घोषणा के साथ ही ये सियासी लड़ाके सक्रिय होते थे। इस बार खामोश हैं।
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एसपी यादव, विनय कुमार पांडेय, सत्यदेव सिंह, पंडित सिंह व रिजवान जहीर। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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सियासी दौर में कुछ नेता ऐसे हैं जो माहौल को गर्माने के लिए जाने जाते हैं। परिणाम कुछ भी हो, लेकिन चुनावी रंगत देखते ही बनती थी। मैदान में उतरने का मूड बनाएं तो समीकरण साधने के जादूगर के रूप में पहचान बनती थी। किसी के लिए तारणहार तो किसी के लिए संकट बनने के साथ ही अपना रास्ता भी बनाने में माहिर ये नेता इस बार मैदान से ही बाहर हैं। श्रावस्ती संसदीय सीट के ऐसे ही दो पूर्व सांसद इस समय प्रदेश की दो जेलों में कैद हैं। चर्चाएं तो उनकी हैं, लेकिन उनके रुख की जानकारी किसी को नहीं है।

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श्रावस्ती संसदीय सीट से सांसद रहे और कैसरगंज के साथ ही गोंडा से भी हाथ आजमाने वाले विनय कुमार पांडेय उर्फ विन्नू अभी राजनीतिक तस्वीर से ही नदारद हैं। वह गोंडा जिला कारागार में धोखाधड़ी के एक मामले में सजा काट रहे हैं। कल्याण सिंह सरकार में होमगार्ड व कारागार राज्यमंत्री रह चुके पूर्व सांसद की गोंडा व बलरामपुर की राजनीति में खासी पकड़ रही। उनकी पत्नी अविभाजित गोंडा की जिला पंचायत अध्यक्ष भी रह चुकी हैं।

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वर्ष 2004 में गोंडा व 2019 में कैसरगंज संसदीय सीट से कांग्रेस से चुनाव लड़ चुके विनय पांडेय की चर्चाएं इस समय हैं तो, लेकिन उनका स्टैंड अभी तक स्पष्ट नहीं हो सका। हाईकोर्ट से रिहाई के बाद अभी उनके जेल से बाहर आने का इंतजार है। 

इसी तरह तराई के बाहुबली माने जाने वाले रिजवान जहीर का सियासी सफर भी काफी लंबा है। वह भी इस समय तुलसीपुर नगर पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि फहीम अहमद उर्फ पप्पू की हत्या के मामले में ललितपुर जेल में बंद हैं। बीते दिनों उनकी जमानत एक केस में हुई थी तो राजनीति में आने की चर्चाएं जोर पकड़ने लगी थीं। लेकिन अभी गैंगस्टर व जानलेवा हमले के मामले में जमानत नहीं मिल सकी है। इस तरह यह दोनों सियासी नेता अभी सलाखों के पीछे ही हैं, जबकि सियासत में इनकी अलग ही पहचान है। दोनों के पास अपने- अपने वोट बैंक भी बताए जाते हैं, जिससे राजनीति में हलचल पैदा करने का माद्दा भी रखते हैं। 

चुनाव में इस बार नहीं दिखेंगे महारथी
लोकसभा चुनाव हो या फिर विधानसभा, अपने स्वभाव और प्रभाव के लिए चर्चित सियासी महारथी इस बार मैदान में नहीं दिखेंगे। गोंडा ही नहीं, देवीपाटन मंडल की राजनीति में अलग पहचान रखने वाले पूर्व मंत्री विनोद कुमार सिंह उर्फ पंडित सिंह व समाजवाद के पुरोधा पूर्व मंत्री शिव प्रताप यादव का निधन हो चुका है।
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- इसी तरह पूर्व सांसद सत्यदेव सिंह भी पुराने नेताओं में शुमार थे। उनका भी निधन हो चुका है। इसी तरह गैसड़ी विधायक शिव प्रताप यादव भी नहीं दिखेंगे। वह होते तो राजनीतिक दिशा ही दूसरी होती। इसी तरह पूर्व सांसद सत्यदेव सिंह का ओजस्वी भाषण भी मतदाताओं को सुनने को नहीं मिलेगा।

प्रत्याशी भी तय न होने से चुनावी सन्नाटा
राजनीतिक माहौल बनाने वाले नेताओं के साथ ही प्रत्याशियों की कमी भी इस बार खल रही है। कैसरगंज संसदीय क्षेत्र में अभी किसी दल ने प्रत्याशी ही तय नहीं किया है। श्रावस्ती में सिर्फ भाजपा के साथ ही बहराइच व गोंडा में सपा व भाजपा के प्रत्याशी ही अभी मोर्चे पर हैं। इससे चुनावी रंगत नहीं बढ़ रही।

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