सियासत के सबसे बड़े रण का चुनावी माहौल है। ऐसे में यूपी की राजधानी लखनऊ यानी नवाबों का शहर भी सियासत का बड़ा केंद्र बना हुआ है। जनता एक बार फिर से सरकार के कामकाज के लेखा-जोखा में जुटी है। लोगों को ही अब तय करना है कि उनके शहर की तस्वीर कितनी बदली है। मौजूदा डबल इंजन की सरकार की ओर से जो वादे किए गए थे वो पूरे हो चुके हैं या फिर अभी बहुत कुछ होना बाकी है। विकास की रफ्तार में शहर को क्या मिला, क्या नहीं मिला और अभी क्या अपेक्षाएं है? राजधानी की तरक्की से ही राज्य में हुए विकास कार्यों का अंदाजा लगाया जा सकता है?
मेट्रो आई, लेकिन विस्तार नहीं हुआ
अगर बीते पांच सालों में लखनऊ में आए बदलावों की बात करें तो अब यहां मेट्रो दौड़ रही है। अब मेट्रो ट्रेन एयरपोर्ट से लेकर ट्रांस गोमती के दूसरे छोर इंदिरा नगर तक लोगों के आने-जाने का बड़ा साधन बन गई है। आने वाले दिनों इसके और विस्तार होने की संभावना है लेकिन अपेक्षाकृत इसका विस्तार नहीं हो सका।
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कम हुई जाम की समस्या
एलडीए क्षेत्र में रहने वाले अमित अवस्थी कहते हैं कि मेट्रो ने न सिर्फ शहर को एक नई पहचान दी बल्कि काफी हद तक जाम की समस्या को भी खत्म कर दिया है। वहीं लखनऊ आगरा एक्सप्रेसवे ने दिल्ली जाने का रास्ता सुगम बनाया है। अब लखनऊ वालों को दिल्ली जाने के लिए लखनऊ आगरा एक्सप्रेसवे और फिर आगे यमुना एक्सप्रेसवे का रास्ता खूब भाता है। कहना गलत नहीं होगा कि लखनऊ के लिए मेट्रो और आगरा एक्सप्रेसवे किसी बदलाव की शुरुआत से कम नहीं है।
यहां भी बदली तस्वीर
- यातायात के बाद बीते सालों में लखनऊ ने अपनी खूबसूरती और सुविधाओं को भी बढ़ाया।
- गोमती किनारे बने रिवर फ्रंट ने न सिर्फ लखनऊ वालों का, बल्कि फिल्मी दुनिया के लोगों का भी दिल मोहा।
- कई फिल्मों की शूटिंग रिवर फ्रंट पर हुई, तो रोज सैकड़ों लोग सैर सपाटे के लिए यहां आते।
- अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम खिलाड़ियों के लिए नई ऊर्जा का केंद्र बना।
ऐसे हो रहा है बदलाव
- शहर में मॉल कल्चर ने दस्तक दी तो हर ओर शॉपिंग मॉल खड़े हो गए।
- ट्रांस गोमती क्षेत्र में होटल इंडस्ट्री ने भी पैर फैला लिए।
- राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर के तमाम होटल शहर में खुल चुके हैं।
- इंडस्ट्री के आने से रोजगार के अवसर तेजी से बढ़े।
सुरक्षा और विकास से बनी बात
- आलमबाग क्षेत्र में एक निजी क्लीनिक चलाने वाली रूपाली कहती हैं कि अब लखनऊ में काम करने के दौरान लगता है कि दिल्ली और बंगलुरु में हैं। यहां काम करने का माहौल महिलाओं के अनुकूल बनने लगा है। इससे खासकर महिलाओं को बेहतर काम करने के अवसर मिलेंगे। यह सही कदम है।
- कृष्णा नगर के रहने वाले रुपेश शुक्ला बताते हैं कि शहर बदल रहा है। यह युवाओं के लिए अच्छा संकेत है। लखनऊ में एचसीएल जैसी आईटी कंपनी ने अच्छी शुरुआत की है। शहर में मिडलैंड,फॉर्टिस, अपोलो जैसे बड़े निजी अस्पताल खुल रहे हैं तो वहीं दूसरी तरफ कैंसर इंस्टीट्यूट ने भी उम्मीद की किरण जगाई है।
- एक कर्मचारी मोहित का कहना है कि बीते पांच सालों में लखनऊ ने तरक्की के रास्ते पर तेजी से कदम बढ़ाए हैं। अब जरूरत है इन तेजी से बढ़ते कदमों को और गति देने की, जो चुनावी माहौल के बाद नई सरकार की जिम्मेदारी होगी।