कभी महज 50 हजार रुपये खर्च कर प्रत्याशी चुनाव लड़कर संसद भवन पहुंच जाते थे लेकिन अब इसके लिए करोड़ों खर्च करने पड़ रहे हैं। चुनाव आयोग की ओर से ही इस बार खर्च का दायरा 95 लाख कर दिया गया है। पहले चुनाव के समय शोर भी बहुत कम होता था। सिर्फ एक जीप व साइकिल से ही प्रचार हो जाता था। अब तो लग्जरी वाहनों का काफिला प्रत्याशी के साथ चल रहा है।