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सपा-बसपा गठबंधन के गणित की काट पर भाजपा की नजर, टिकट देने में जातियों के बीच ऐसे बनाया संतुलन

Tue, 23 Apr 2019 01:06 PM IST
ishwar ashish सचिन मुद्गल/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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भाजपा की ओर से उत्तर प्रदेश की सभी लोकसभा सीटों के उम्मीदवार घोषित कर देने के बाद जो तस्वीर दिख रही है, उससे पता चलता है कि पार्टी के रणनीतिकारों ने मिशन 74 प्लस का लक्ष्य पूरा करने के लिए गठबंधन के गणित की काट पर निगाह रखी है।

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अगड़ा, पिछड़ा और अनुसूचित जाति के बीच संतुलन बनाते हुए 34 अगड़े, 17 अनुसूचित जाति और 26 पिछड़ों को टिकट दिया है। एक पारसी को भी प्रत्याशी बनाया है। अनुसूचित जाति के उम्मीदवारों में गैर जाटव तो पिछड़ों में गैर यादव प्रत्याशियों को तवज्जो दी गई है। पार्टी ने मुख्य रूप से कुर्मी, मौर्य, जाट, गुर्जर, निषाद पर दांव लगाया है।

प्रदेश की 80 सीटों में से भाजपा 78 पर चुनाव लड़ रही है। मिर्जापुर और रॉबर्ट्सगंज (सुरक्षित) सीट सहयोगी अपना दल (एस) को दी है। भाजपा ने अपनी 78 सीटों में से सबसे ज्यादा 17 सीटों पर ब्राह्मण समाज के उम्मीदवार उतारे हैं। ब्राह्मणों के बाद अपना परंपरागत वोट बैंक पक्का करने के लिए ठाकुरों को 14 सीटों पर उम्मीदवार बनाया है। वहीं, वैश्य समाज से भी दो प्रत्याशी उतारे हैं।

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पिछड़ों में इन पर फोकस

वैसे तो पिछड़ी जातियों में यादवों की हिस्सेदारी लगभग 20 प्रतिशत है, पर भाजपा ने इन्हें सिर्फ एक टिकट दिया है। इसकी वजह संभवत: यादव बिरादरी का सपाई खेमे के साथ होना है। पार्टी ने पिछड़े वर्ग में लगभग 8 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले कुर्मियों को सर्वाधिक 7 टिकट दिए हैं।

कुर्मी समाज के बाद पिछड़ी जातियों में 3 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले जाटों को 4 सीटें दी गई हैं। लगभग 5 प्रतिशत हिस्सेदारी वाले मौर्य, शाक्य, सैनी और कुशवाहा बिरादरी के भी 4 लोग उम्मीदवार बनाए गए हैं। निषाद और लोध समाज को तीन-तीन सीटें दी गई हैं।

पिछड़ों की आबादी में निषाद और लोध 5 प्रतिशत हैं। पिछड़ों में गुर्जर बिरादरी की भागीदारी 2 प्रतिशत है। कश्यप, यादव, राजभर और तेली समाज को भी पार्टी ने एक-एक सीट दी है।

एससी में पासी और खटिक पर दांव

भाजपा ने प्रदेश में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित 17 सीटों में पासी और खटिक समाज पर दांव खेला है। 6 सीटों पर पासी, 3 सीटों पर खटिक और दो सीटों पर जाटव उम्मीदवार उतारे हैं। वाल्मीकि, धनगर, कठेरिया, कोरी और गोंड समाज को भी एक -एक सीट दी गई है।

पार्टी ने हरदोई, मिश्रिख, मोहनलालगंज, बाराबंकी, मछलीशहर और बांसगांव में पासी समाज के उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है। बुलंदशहर, कौशांबी और लालगंज सीट पर खटिक बिरादरी के चेहरे उतारकर समीकरण साधे गए हैं।

वाल्मीकि समाज को हाथरस, धनगर समाज को आगरा, जाटव समाज को शाहजहांपुर व नगीना, कठेरिया समाज को इटावा, कोरी समाज को जालौन, गोंड समाज को बहराइच और कोल समाज को रॉबर्ट्सगंज सीट दी गई है। यहां बता दें कि भाजपा के सहयोगी अपना दल (एस) ने रॉबर्ट्सगंज (सुरक्षित) सीट से कोल समाज के पकौड़ी लाल को टिकट दिया है।
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फिर भी कुछ समाजों को नहीं मिला मौका

प्रदेश में जायसवाल समाज, खत्री पंजाबी समाज, कायस्थ समाज को भी भाजपा का वोट बैंक माना जाता है। लेकिन इन समाजों को मौका नहीं दिया है।

2014 में यह था जातीय गणित
2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने 17 ब्राह्मण, 14 ठाकुर, 2 वैश्य और 1 भूमिहार को उम्मीदवार बनाया था। पिछड़ा वर्ग में 1 यादव, 4 कुर्मी, 5 जाट, 2 गुर्जर, 5 लोधी, 3 सैनी, शाक्य, कुशवाहा, 1 निषाद, 1 पारसी, 1 पाल, 1 कुम्हार और एक राजभर को टिकट दिया था।

अनुसूचित जाति वर्ग में 6 पासी, 4 जाटव, दो खटिक को टिकट दिया था। कोरी, कठेरिया, खरवार, निषाद और नट समाज को एक-एक टिकट दिया था।
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