सपा नेताओं का कहना है प्रत्याशी के संबंध में अंतिम फैसला पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव एक-दो दिन में करेंगे। लखनऊ से पूनम सिन्हा के अलावा किसी ब्राह्मण चेहरे की भी तलाश है। राजधानी में ब्राह्मण वोटों की तादाद अच्छी-खासी है। कांग्रेस ने भी अभी तक यहां से कोई प्रत्याशी नहीं उतारा है।
कुछ लोगों का प्रयास है कि भाजपा के खिलाफ विपक्ष का संयुक्त प्रत्याशी उतारा जाए। कांग्रेस के कुछ नेता इसके पक्षधर भी हैं। उनका कहना है कि इससे भाजपा को टक्कर दी जा सकती है।
पिछली बार राजनाथ के सामने कांग्रेस, सपा व बसपा, तीनों दलों में ब्राह्मण और आम आदमी पार्टी ने मुस्लिम उम्मीदवार उतारा था। सूत्रों का कहना है कि ज्यादा उम्मीद किसी कायस्थ या ब्राह्मण को चुनाव लड़ाने की है। संयुक्त उम्मीदवार उतारने को लेकर फिलहाल सपा-कांग्रेस में सहमति नहीं बनी है।