प्रधानमंत्री ने 28 मार्च को मेरठ में सभा करके प्रचार अभियान शुरू किया। भाजपा ने मोदी की प्रदेश में 50 सभाएं मांगी थी। लेकिन 27 सभाओं को ही मंजूरी मिली। बाद में इसमें दो सभाएं और जुड़ी। हालांकि चुनाव प्रचार की औपचारिक शुरुआत सीएम योगी ने सहारनपुर में मां शाकुंभरी देवी मंदिर के दर्शन और सभा के साथ पहले ही कर दी थी।
योगी ने लोकसभा के सभी क्षेत्रों में एक-एक सभा की। पर जब कहीं से उनकी अन्य सभाओं की मांग हुई तो यह संख्या बढ़कर 137 हो गई। योगी की मांग सिर्फ यूपी में ही नहीं रही, बल्कि मध्यप्रदेश, राजस्थान सहित देश के अन्य कई प्रदेशों और खासतौर से पश्चिम बंगाल में भी रही। वहां भी उनकी कई सभाएं हुईं।
वैसे तो सभी दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर रहा। पर भाजपा के स्टार प्रचारकों ने पूरा चुनाव राष्ट्रवाद, विकास और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों पर फोकस कर लड़ा। मुद्दे सेट करने पर भी ध्यान दिया।
पश्चिम में हिंदुत्व के एजेंडे को धार दी तो पूरब में चुनाव को पिछड़ी जातियों की लामबंदी पर केंद्रित रखा। चुनाव आयोग ने जब योगी की सभाओं पर 72 घंटे की रोक लगाई तो वे हनुमान मंदिरों के दर्शन के सहारे चुनावी सरोकार पूरे करते दिखे।
पीएम मोदी ने जहां अपनी सभाओं से कांग्रेस के 55 साल बनाम अपने पांच वर्ष के कार्यकाल को मुद्दा बनाया तो सीएम योगी ने भी अपने दो वर्षों का रिपोर्ट कार्ड देकर कांग्रेस और अन्य विपक्ष को अपने काम न बताने को लेकर घेरा।