लोकसभा के पिछले चुनाव की तुलना में इस बार पूर्वांचल की ‘हाई प्रोफाइल’ सीटों पर रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा। पूर्वी यूपी में करीब आधा दर्जन सीटें ऐसी हैं जहां भाजपा, कांग्रेस और सपा-बसपा गठबंधन के दिग्गज चुनाव लड़ रहे हैं। इनके कंधों पर अपनी सीट पर जीत का अंतर बढ़ाने के साथ ही प्रदेश में पार्टी की सीटों की संख्या बढ़ाने का भी जिम्मा है।
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वाराणसी से जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं पड़ोसी जिले चंदौली से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय चुनाव मैदान में हैं। केंद्रीय मंत्रियों में मनोज सिन्हा के गाजीपुर और अनुप्रिया पटेल के मिर्जापुर से तो आजमगढ़ से सपा मुखिया अखिलेश यादव के मैदान में होने से मुकाबला रोचक हो गया है।
प्रियंका गांधी वाड्रा के सक्रिय राजनीति में आने के बाद अब उनके चुनाव लड़ने की चर्चा और सपा-बसपा गठबंधन के एक साथ चुनावी जंग में उतरने से ‘हाई प्रोफाइल’ सीटों पर मुकाबला दिलचस्प होने की संभावना है।
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वाराणसी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यहां से दोबारा चुनाव मैदान में हैं। पिछले चुनाव में आप नेता अरविंद केजरीवाल यहां मोदी से मुकाबला करने उतरे थे, जिससे चुनावी जंग दिलचस्प हो गई थी। मोदी को जहां 5.81 लाख वोट मिले थे, वहीं केजरीवाल को 2.04 लाख वोट मिले थे।
सपा और बसपा के अलग-अलग लड़ने से इनके उम्मीदवारों की उपस्थिति दमदार नहीं बन पाई थी। इस बार सपा-बसपा मिलकर चुनाव मैदान में हैं। ऐसे में मुस्लिम मतदाताओं का रुझान गठबंधन की तरफ हो सकता है। कांग्रेस से प्रियंका के मैदान में उतरने की चर्चा ने इस सीट को लेकर सियासी सरगर्मी बढ़ा दी है। यदि प्रियंका मैदान में आती हैं तो यहां का मुकाबला देखने वाला होगा।
चंदौली
mahendra nath pandey
वाराणसी से सटी सीट चंदौली से मौजूदा सांसद और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. महेंद्रनाथ पांडेय मैदान में हैं। इस सीट पर अभी तक न तो सपा-बसपा गठबंधन का प्रत्याशी सामने आया है और न ही कांग्रेस के उम्मीदवार की घोषणा हुई है।
पिछले चुनाव में महेंद्रनाथ पांडेय ने बसपा के अनिल कुमार मौर्य को करीब 1.50 लाख वोट से हराकर लंबे समय बाद यह सीट भाजपा के खाते में डाली थी। दूसरे नंबर पर रही बसपा को 2.57 लाख और तीसरे नंबर पर रही सपा को 2.04 लाख वोट मिले थे।
इस तरह गठबंधन को भाजपा से अधिक वोट मिला था। इस बार सपा-बसपा का गठबंधन है। वहीं, सरकार में सहयोगी ओमप्रकाश राजभर के तेवर डॉ. पांडेय की चुनौती बढ़ा रहे हैं। ऐसे में भाजपा को यह सीट जीतने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ेगी।
मिर्जापुर
अनुप्रिया पटेल
मौजूदा सांसद तथा केंद्रीय मंत्री व अपना दल (सोनेलाल) की संरक्षक अनुप्रिया पटेल मिर्जापुर से चुनाव लड़ रही हैं। वह 2014 के चुनाव में 4.36 लाख वोट पाकर जीती थीं। बसपा दूसरे और कांग्रेस तीसरे नंबर पर रही थी। सपा चौथे नंबर पर थी।
इस बार कांग्रेस ने फिर ललितेश त्रिपाठी पर दांव लगाया है। वहीं, सपा और बसपा के साथ होने से यहां वोटों का गणित बदल सकता है। ऊपर से प्रियंका की सक्रियता का भी किसी न किसी रूप में असर दिखेगा। ऐसे में अनुप्रिया को कड़ा मुकाबला करना पड़ सकता है।
आजमगढ़
सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव।
- फोटो : amar ujala
मुलायम सिंह यादव अभी यहां से सांसद हैं, लेकिन इस बार पिता की इस सीट पर पुत्र अखिलेश यादव चुनाव लड़ेंगे। उनका मुकाबला भाजपा प्रत्याशी और भोजपुरी फिल्म स्टार दिनेशलाल यादव निरहुआ से है। लोकसभा के पिछले चुनाव में मुलायम को 3.40 लाख और भाजपा प्रत्याशी रमाकांत यादव को 2.77 लाख वोट मिले थे।
बसपा को 2.66 लाख वोट मिले थे। कड़े संघर्ष में मुलायम मात्र 63,204 वोट से ही जीत पाए थे। इस बार सपा-बसपा साथ हैं। ऊपर से ओमप्रकाश राजभर के तेवर को देखते हुए भी आजमगढ़ की लड़ाई दिलचस्प हो सकती है। ऐसे में देखना दिलचस्प होगा कि फिल्मों से लोगों को दीवाना बनाने वाले निरहुआ मतदाताओं को किस सीमा तक दीवाना बना पाते हैं।
केंद्रीय मंत्री और सांसद मनोज सिन्हा को भाजपा ने फिर यहां से प्रत्याशी बनाया है। सपा-बसपा गठबंधन ने बाहुबली मुख्तार अंसारी के बड़े भाई अफजाल अंसारी को उतारा है। पिछले चुनाव में सपा से शिवकन्या कुशवाहा ने यहां मनोज सिन्हा को कड़ी टक्कर दी थी और वे मात्र 32 हजार वोट से ही जीत पाए थे।
पिछली बार यहां सपा-बसपा के वोट का आंकड़ा भाजपा को मिले वोटों से काफी अधिक था। इस बार सपा-बसपा गठबंधन करके चुनाव मैदान में हैं। गठबंधन की चुनौती के साथ ही मनोज सिन्हा को सुभासपा नेता ओमप्रकाश राजभर के गृहजिला होने के नाते उनकी नाराजगी का भी सामना करना पड़ सकता है। यहां राजभर बिरादरी ठीक-ठाक संख्या में है।