मेट्रो की हाई पावर कमेटी मीटिंग में बड़े फैसले होंगे। इस बात की औपचारिक पुष्टि लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एलएमआरसी) के निदेशक ने शनिवार को कर दी।
टर्न-की पर मेट्रो का काम होगा या नहीं, इस संबंध में भी बड़ा फैसला 17 दिसंबर को होने वाली बैठक में होगा।
ऐसे में यह तय है कि 17 दिसंबर का दिन मेट्रो रेल परियोजना के लिए मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।
फिलहाल दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को साथ लिया जाएगा या रेल विकास निगम लिमिटेड (आरवीएनएल) को, इससे पर्दा अभी नहीं उठाया है।
26 दिसंबर को डीएमआरसी की बोर्ड मीटिंग
एलएमआरसी के निदेशक राजीव अग्रवाल के अनुसार 26 दिसंबर को डीएमआरसी की बोर्ड मीटिंग होगी। मगर, इससे पहले अगर एचपीसी के टर्न-की का निर्णय लेने पर सवाल खड़ा होगा कि क्या डीएमआरसी को काम न देने का फैसला सरकार ने ले लिया गया है।
गुपचुप तरीके से एलएमआरसी के ऑफिस में 17 दिसंबर को होने वाली एचपीसी का एजेंडा तैयार किया जा रहा है। वेबसाइट, लोगो, भूमि अधिग्रहण और कुछ अन्य मुद्दों को बैठक में रखा जाना है।
सबसे अधिक महत्वपूर्ण मुद्दा है कि आखिरकार सरकार मेट्रो संबंधित निर्माण कार्य को किस रूप में करवाएगी। इसका जवाब देने को कोई तैयार नहीं है।
सामने हैं तीन विकल्प
1. पहला विकल्प है कि डीएमआरसी की 26 दिसंबर को होने वाली बोर्ड मीटिंग का इंतजार किया जाए। अगर कॉरपोरेशन लखनऊ मेट्रो का काम करने का फैसला अपनी मीटिंग में कर दे, तो काम उसे ही दे दिया जाए। टर्न-की के आधार पर फिर डीएमआरसी यहां का काम करेगा।
2. डीएमआरसी को दरकिनार कर रेल विकास निगम लिमिटेड को काम दे दिया जाए। मगर दिक्कत यह है कि आरवीएनएल मेट्रो निर्माण क्षेत्र की नई संस्था है। कोलकाता में उसका परसेंटेज 9.25 फीसदी है। यह बजट डीएमआरसी के मुकाबले 3.25 फीसदी अधिक है।
3. तीसरा विकल्प है कि लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन खुद टेंडर करे और एलएंडटी जैसी किसी कंपनी का चयन कर मेट्रो निर्माण का काम करवाए। ऐसा करने के लिए एलएमआरसी को टेंडर कमेटी का भी गठन करना पड़ेगा।