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एक बच्चे की मौत ने बदल दी अनन्य के जीवन की दिशा, अब रक्तदान के जरिए लोगों को दे रहे हैं जीवनदान

Sat, 06 Oct 2018 03:44 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, लखनऊ
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अनन्य गोविंद शर्मा - फोटो : amar ujala
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 विधि के छात्र अनन्य गोविंद शर्मा का उद्देश्य है कि वे कानून की बारीकियों को सीख उसका इस्तेमाल जरूरतमंदों के लिए करें। इस उद्देश्य की पूर्ति करने में अभी उनको समय लगेगा, लेकिन साथ में वे जरूरतमंदों को रक्तदान के जरिए उनकी जिंदगी बचाने का पुनीत कार्य करने में लगे हैं।
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उन्होंने अपने साथियों के साथ मिलकर ऐसा ग्रुप तैयार किया है जो कई प्रदेशों में जरूरतमंदों को रक्त मुहैया कराता है। अनन्य लखनऊ विश्वविद्यालय के एलएलबी ऑनर्स के छात्र हैं। डेढ़ साल पहले एक घटना ने उनको दिल व दिमाग पर ऐसी छाप छोड़ी कि उन्होंने रक्तदान को मुहिम के रूप में शुरुआत की।

 

दरअसल एक बच्चा ब्लड कैंसर से पीड़ित था। डॉक्टर भी भरसक कोशिश कर रहे थे उसे बचाने को। लेकिन खून की कमी की वजह से उसकी मौत हो गई। इस घटना ने अनन्य के सोचने और कुछ करने की दिशा ही बदल दी। उसके बाद उन्होंने कुछ लोगों के साथ मिलकर व्हाट्सएप पर ग्रुप तैयार किया जो जरूरतमंदों को रक्तदान कर सकें।

 

धीरे-धीरे यह कारवां बनता गया और कई लोग इसमें शामिल होते गए। वे नई दिल्ली, मेरठ, ग्वालियर, जालंधर, आगरा, कानपुर समेत कई जिलों व शहरों में जरूरतमंदों को अपने साथियों के जरिए रक्तदान कराकर जीवनदान दे रहे हैं।

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अनन्य को कविता लिखने का भी शौक

अनन्य गोविंद शर्मा - फोटो : amar ujala
किसी को भी रक्त की जरूरत होती है और उनके साथियों को इसकी जानकारी होती है तो उसका मैसेज तेजी से फैलता है। जिस शहर में रक्त की जरूरत होती है वहां के लोगों के बीच में जमकर प्रचार किया जाता है ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग रक्तदान के लिए तैयार हो सकें।
 
अनन्य ने बताया कि उनके साथियों ने अब तक कई लोगों को जीवनदान दिया है। उन्होंने बताया कि वे अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद वकालत के साथ-साथ इस मुहिम को देश के अन्य प्रदेशों में भी ले जाएंगे, ताकि जरूरत पड़ने पर कभी रक्त की कमी न हो।
 
इसके अलावा अनन्य को कविता लिखने व पाठ करने का भी बहुत शौक है। वे कक्षा आठ से कविताएं लिख रहे हैं। शुरू में उन्होंने प्रेम रस की कविताओं से शुरूआत की। इसके बाद वे धीरे-धीरे अपनी कविताओं के जरिए कई मुद्दों पर कटाक्ष कर लोगों को जागरूक करने का काम करने लगे।
 
वे ईटावा, मैनपुरी, सैफई, टुंडला समेत कई शहरों में कविता पाठ कर ख्याती प्राप्त कर चुके हैं। उनकी इच्छा है कि अब तक की कविता संग्रह को एक किताब की शक्ल दी जाए। इसके लिए वे जोर-शोर से प्रयास कर रहे हैं।
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