बतौर सपा प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ‘शाम की दवा’ सस्ती करने का जो वादा पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान किया था, उस पर वे चार साल बाद अब अमल करने जा रहे हैं।
अखिलेश सरकार ने चुनावी साल में पियक्कड़ों को सौगात देते हुए शराब पर एक्साइज ड्यूटी 25 फीसदी तक कम करने का फैसला किया है।
इससे प्रदेश में एक अप्रैल से शराब सस्ती हो जाएगी। रॉयल स्टैग की जो बोतल अभी 760 में मिलती है, उसके दाम घटकर 680 रुपये के आसपास हो जाएंगे।
शराब सस्ती भी होगी और मिलेगी भी आसानी से
ऐसे ही इंपीरियल ब्ल्यू के शौकीनों को 700 में मिलने वाली बोतल तकरीबन सवा छह सौ रुपये में मिल सकेगी।
यही नहीं, पियक्कड़ों की सुविधा के लिए सरकार शराब की 187 दुकानें बढ़ाने भी जा रही है। साफ है कि शराब सस्ती भी होगी और आसानी से मिलेगी भी।
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में मंगलवार को कैबिनेट की बैठक में सूबे की नई आबकारी नीति पर मुहर लग गई। राज्य सरकार ने एक बार फिर दो साल के लिए आबकारी नीति तय की है।
जानिए, नई नीति के बाद कितनी हो जाएगी शराब
नई नीति में देशी शराब पर प्रति लीटर एक रुपये और अंग्रेजी शराब पर प्रति बोतल 25 फीसदी एक्साइज ड्यूटी कम की जा रही है, जबकि बीयर की एक ब्रांड पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई गई है और एक ब्रांड पर इसे कम किया गया है।
सरकार ने इसके साथ ही देसी शराब के कोटे में चार फीसदी की वृद्धि कर दी है। एक्साइज ड्यूटी कम होने से एक अप्रैल से शराब कम दामों पर मिल सकेगी। ऐसे में शराब की खपत बढ़ने से सरकार को तय राजस्व लक्ष्य की प्राप्ति हो सकेगी।
लखनऊ शराब एसोसिएशन के अध्यक्ष सरदार एसपी सिंह के मुताबिक अंग्रेजी शराब के एक क्वार्टर की कीमत में 15 से 20 रुपये और बोतल पर 70 से 80 रुपये तक की कमी आएगी।
उन्होंने कहा कि एक्साइज ड्यूटी कम होने से विदेश से आने वाली जॉनी वाकर, शीवाज रीगल, रॉयल सैल्यूट, वैट 69, ग्लेनफिडिच व अन्य सिंगल मॉल्ट स्कॉच के दामों में भी खासी कमी आएगी। शराब विक्रेता भी अधिक स्टॉक उठा सकेंगे।
शराब से 40 हजार करोड़ रुपये की कमाई का लक्ष्य
यूपी सरकार ने नई आबकारी नीति से दो साल में 40 हजार करोड़ रुपये कमाने का लक्ष्य रखा है। सरकार ने आबकारी का राजस्व लक्ष्य़ बढ़ाते हुए 2016-2017 के लिए 19,250 करोड़ रुपये और 2017-2018 के लिए 20,746 करोड़ का राजस्व तय किया है।
आबकारी नीति तय करने के मामले में अखिलेश सरकार भी मायावती सरकार के नक्शेकदम पर ही चल रही है। माया सरकार ने जिस तरह विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2011 में दो वर्ष के लिए आबकारी नीति तय की थी, उसी तरह सपा सरकार ने भी दो साल के लिए आबकारी नीति का निर्धारण किया है।
वैसे सरकार की सोच है कि एक्साइज ड्यूटी कम करने से शराब सस्ती होगी जिससे अन्य प्रांतों से होने वाली इसकी तस्करी पर काफी हद तक रोक लग सकेगी।