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करोड़ों रुपये की टैक्स चोरी करने का मास्टर माइंड शराब कारोबारी गिरफ्तार

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करोड़ों रुपयों की टैक्स चोरी का आरोपी गिरफ्तार। - फोटो : ??? ?????
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सहारनपुर के टपरी स्थित को-ऑपरेटिव लि. फैक्टरी में अवैध तरीके से शराब निकाल कर करोड़ों की टैक्सी चोरी करने वाले गिरोह का मास्टरमाइंड मनोज कुमार जायसवाल बृहस्पतिवार को एसटीएफ के हत्थे चढ़ गया।
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एसटीएफ ने आरोपी को लखनऊ के आवास विकास परिषद कार्यालय के पास से दबोचा। बरेली के बारादरी, मॉडल हाउस निवासी मनोज के पास एक लाख नकद, मोबाइल व अन्य दस्तावेज मिले हैं। आरोपी 10 महीने से अलग-अलग जगहों पर छिपकर रह रहा था।
मनोज उन्नाव व कानपुर के बड़े शराब व्यवसायी अजय जायसवाल का रिश्तेदार व साझीदार है। पिछले साल मार्च में इस जालसाजी का खुलासा हुआ था। तब से मनोज फरार था।
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आरोपी पर 25 हजार का इनाम घोषित था। मामले में एसटीएफ ने पांच महीने पहले पूर्व मंत्री अमर मणि त्रिपाठी के साले अश्वनी कुमार उपाध्याय को गिरफ्तार किया था।
एसटीएफ के पुलिस अधीक्षक विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक, पिछले साल तीन मार्च को सहारनपुर में छापा मारकर टैक्स चोरी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया था। तब आठ लोगों को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में अश्वनी फिर मनोज जायसवाल का नाम आया था।
कानपुर के व्यापारी के साथ 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी
एसटीएफ के मुताबिक, मनोज की अजय जायसवाल के साथ 25 प्रतिशत की हिस्सेदारी थी। मनोज सहारनपुर स्थित फैक्टरी के सेल्स हेड व कंपनी के मालिक प्रणय जनेजा की फाइनेंस कंपनी के लाइजनिंग अधिकारी अश्वनी उपाध्याय के संपर्क में था। एसटीएफ ने पिछले साल सितंबर में अश्वनी उपाध्याय को गिरफ्तार किया था। अश्वनी पूर्व मंत्री अमर मणि त्रिपाठी का साला है। अमर मणि त्रिपाठी व उनकी पत्नी मधु मणि कवयित्री मधुमिता शुक्ला हत्याकांड में जेल में बंद है, जबकि अश्वनी का भांजा अमन मणि त्रिपाठी नौतनवां से निर्दलीय विधायक है।
ऐसे होती थी टैक्स चोरी
फैक्टरी के कई कर्मचारी, आबकारी विभाग के अधिकारी-कर्मचारी समेत कई लोग इस धंधे में मिले हुए थे। एक ही इनवाइस पर शराब की पेटी लेकर दो ट्रकों को फैक्टरी से बाहर निकाल दिया जाता था। गेट पास एक ही गाड़ी का बनता था। इससे एक गाड़ी का टैक्स बचा लिया जाता था। आबकारी विभाग के अफसरों को टैक्सी चोरी के बदले में 500 रुपये प्रति पेटी यानी प्रत्येक ट्रक, जिसमें 1500 पेटी शराब लदी होती थी। इसके बदले में 7.50 लाख रुपये रिश्वत दिये जाते थे। पिछले साल मामला सामने आने के बाद कई आबकारी अधिकारी व कर्मचारी निलंबित भी किए गए थे।
पत्नी के नाम बरेली व कानपुर में दुकानें
एसटीएफ के मुताबिक, 1992 में इंटर करने के बाद मनोज पिता के व्यापार में जुट गया और उनके ट्रक बरेली क्षेत्र में चलवाने लगा। वर्तमान में आरोपी की पत्नी के नाम से बरेली व कानपुर में देसी शराब के ठेके हैं। एक ठेका उसके नाम से भी है। परिचितों के नाम पर देसी शराब की 19 दुकानें खुलवा रखी हैं। सहारनपुर के टपरी से आने वाली अवैध शराब को अपने ठेके पर ही खपाता था। इसके अलावा बरेली में 21 डाउन-टाउन बार एवं रेस्टोरेंट भी उसने खोल रखा है।
जमीन की दलाली से शराब के कारोबार तक का सफर
एसटीएफ के मुताबिक, मनोज बरेली में जमीनों व मकानों की दलाली करता था। इसके बाद वह शराब की फुटकर दुकानों का लाइसेंस बनवाकर शराब के कारोबार में आ गया। 2017 में प्लॉटिंग का काम बंदकर शराब का कारोबारी ही करने लगा।
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