एलडीए अधिकारियों का कहना है कि रेरा के आने के बाद काफी हालात बदल रहे हैं। निजी बिल्डर पर जहां समय पर कब्जा देने का दबाव बन रहा है, वहीं बेहतर डिजाइन और लुक की वजह से पहले ही लोगों को निजी बिल्डर के प्रोजेक्ट पसंद आते रहे हैं।
अब अगर एलडीए को अपने प्रोजेक्टों में फ्लैट बेचने हैं तो निजी बिल्डरों की तरह काम करना ही होगा। इसीलिए पहली बार प्रतिस्पर्धा कराकर बिल्डिंग का डिजाइन और लुक तय किया जाएगा। इसके बाद निर्माण शुरू होगा।
बिना बिके फ्लैटों की लंबी सूची बनने के बाद अब एलडीए महंगे फ्लैट बनाने से तौबा कर चुका है। इस योजना में अधिकतम 700 वर्गफीट के दो बीएचके के फ्लैट बनाए जाएंगे। इनकी ऊंचाई कितनी होगी? यह भी आर्किटेक्ट के डिजाइन पर निर्भर करेगा। फ्लैटों की अंतिम संख्या भी इसी डिजाइन से तय होनी है। निर्माण शुरू होने के बाद ही इसमें पंजीकरण भी एलडीए खोलेगा।
35 लाख रुपये आएगी कुल लागत
ऐशबाग में इंप्रूवमेंट ट्रस्ट की कब्जा हुई जमीन खाली कराने के बाद यह निर्माण हो रहा है। इसके लिए भू-उपयोग भी एलडीए बदल चुका है। यहां करीब पांच एकड़ जमीन में निर्माण होना है। एलडीए इन फ्लैटों की बिक्री कीमत 28 लाख रुपये प्रस्तावित कर रहा है। वहीं 90 वर्गमी से कम साइज की वजह से एक प्रतिशत जीएसटी इस कीमत पर लागू होगा। पार्किंग शुल्क, फ्रीहोल्ड व अन्य मद में भुगतान सहित करीब 35 लाख रुपये में यह फ्लैट मिल जाएगा।
अब नहीं दिखेगी सरकारी टाइप बिल्डिंग
हम शहर के लोगों को ऐसे फ्लैट ऑफर करना चाहते हैं जिनमें आवंटियों को यह न लगे कि वे किसी सरकारी टाइप बिल्डिंग में आ गए हैं। लोगों को बेहतर लुक और डिजाइन के साथ तैयार बिल्डिंग में फ्लैट तैयार कर दिए जाएंगे। आवंटियों की हर सुविधा का ध्यान भी इसमें रखा जाएगा। इसे आर्किटेक्ट के बीच प्रतिस्पर्धा के जरिए सुनिश्चित किया जाएगा। - प्रताप शंकर मिश्रा, अधिशासी अभियंता, एलडीए