एलडीए 30 हजार गरीबों को छह माह में आवास मुहैया कराएगा। दरअसल नए शासनादेश के तहत निजी कंपनियों को 20 फीसदी आवास लोअर इनकम ग्रुप को देने हैं।
लेकिन अधिकतर निजी कंपनियों ने अब तक पंजीकरण और आवंटन की प्रक्रिया शुरू नहीं की है। ऐसी कंपनियों से एलडीए ने गरीब आवासों की सूची और अन्य जानकारियां मांगी हैं।
नए शासनादेश के मुताबिक, अब न केवल इंटीग्रेटेड और हाइटेक टाउनशिप पॉलिसी के तहत 20 फीसदी मकान लोअर इनकम ग्रुप (एलआईजी) और इकानॉकिल वीकर सेक्शन (ईडब्ल्यूएस) को दिए जाएंगे। बल्कि उनका पंजीकरण और आवंटन विकास प्राधिकरण करेगा।
यह नियम तो बना दिया गया था, मगर कंपनियां इसको वास्तविकता में अमल में ला रही हैं या नहीं, इसकी कोई व्यवस्था तय नहीं थी।
इससे पहले कंपनियां प्रथम आगत, प्रथम स्वागत (फर्स्ट कम, फर्स्ट सर्व) के आधार पर आवंटन कर रही थीं। गरीबों के आशियाने किसको मिले, इसका पता नहीं चल पाता था।
इसलिए सरकार ने एलडीए को साफ निर्देश दिया है कि वे अब खुद ही ऐसे मकानों की आवंटन प्रक्रिया परखें। जैसे प्राधिकरण अपनी स्कीम लांच करता है, और लॉटरी होती है और उसके बाद आवंटन किए जाते हैं।
इसी तरह से अब निजी कंपनियों में गरीबों की स्कीमों के लिए भी किया जाएगा। इससे निजी क्षेत्र में सरकारी नीति के हिसाब से कम आय वर्ग के लोगों को मकान मिल पा रहे हैं या नहीं इसका खुलासा हो जाएगा।