एलडीए में समायोजन का एक और खेल सामने आया है। इस बार करीब 2.50 करोड़ रुपये के बाजार भाव के प्लॉट रसूखदारों को 66 लाख रुपये में देने का खेल किया गया है। वर्षों तक जिन प्लॉटों को उनके आवंटी भूल चुके थे,ऐसे प्लॉटों से जुड़े खातों में इस वर्ष अचानक एक साथ लाखों रुपये जमा कर दिए गए।
इसके बाद प्लॉट का पूरा धन जमा मान लिया गया। जबकि ये एलडीए के नियमों के विरुद्ध है। आरोप है कि अब इस मामले में समायोजन की तैयारी है। विनम्रखंड के दो और गोमती नगर विस्तार के एक प्लॉट पर 2015 जून में करीब 60 लाख रुपये जमा किए गए।
जबकि इतने बड़े भुगतान के लिए एलडीए वीसी के अनुमोदन का नियम है। इसके बावजूद निचले स्तर पर पूरा खेल कर कायदों को ताक पर रख कर दिया गया। दलालों और बाबुओं की मिलीभगत से लगभग मरणासन्न आवंटन प्रक्रिया को दोबारा जिंदा कर दिया गया है।
विन्रम खंड के प्लॉट 1982 और 1994 में आवंटित किए गये थे। जबकि,गोमती नगर विस्तार का प्लाट 1994 में आवंटित किया गया था। तीनों ही प्लॉटों के मामले में कर्मचारियों और अधिकारियों की लगभग एक ही चेन काम कर रही है। योजना सहायक से लेकर ऊपर तक तीनों ही प्लॉटों में एक जैसे लोग ही सामने आ रहे हैं।