सरोजनीनगर विधायक शारदा प्रताप शुक्ला की सपा सरकार में खूब ठसक रही। आशियाना में एलडीए की जमीन पर कब्जा कर लिया, पर प्राधिकरण के अफसर कार्रवाई तो दूर एक चेतावनी तक नहीं दे पाए।
मंत्री बन गए तो ठसक और बढ़ गई। यह शारदा का रुतबा ही था कि अवैध निर्माण के मामले में हाईकोर्ट के सख्त रुख के बावजूद एलडीए के अफसर कार्रवाई से हिचकिचाते ही रहे।
अफसर जेसीबी लेकर मौके पर पहुंचे तो पर खुद तोड़ने के लिए नहीं बल्कि शारदा को मौका देने के लिए कि वे अपनी मर्जी से जितने हिस्से को अवैध माने गिरवा लें। आखिर मंत्री के लोगों ने सांकेतिक रूप से अवैध निर्माण तोड़ दिया। पर, इतने सबके बावजूद शारदा के रुतबे में कोई बट्टा नहीं लगा।
उनका मंत्री पद बरकरार रहा। पर, जब उन्होंने बगावत की तो मंत्री पद छीन लिया गया। शारदा प्रताप शुक्ला बृहस्पतिवार को एलडीए में चर्चा के वह हॉट टॉपिक रहे। एक ही चर्चा रही कि किस कदर उन्होंने सारे नियम-कानून ताक पर रखकर सरकारी जमीन कब्जा कर दुकान बनवा ली थी।
उस जमीन पर दबंगई दिखाकर एलडीए को कब्जा लेने तक नहीं दिया जा रहा था। अब जब सियासी बगावत हुई और उन्होंने सपा को छोड़कर रालोद का दामन थाम लिया तब जाकर उनपर कार्रवाई हुई। कर्मचारियों में चर्चा रही कि अचानक से शारदा की बुराइयां नजर आने लगीं।
मंत्री को दिया था निर्माण तुड़़वाने का मौका
शारदा प्रताप शुक्ला
- फोटो : demo pic
हाईकोर्ट के आदेश के बाद जब कोई रास्ता नहीं बचा तो 13 दिसंबर 2016 को एलडीए ने अवैध निर्माण ढहाने का वक्त मुकर्रर किया। पर, इसके एक दिन पहले इज्जत बचाने के लिए शारदा को खुद निर्माण तुड़वाने का मौका दे दिया।
जेसीबी भी एलडीए के इंजीनियर्स ने उपलब्ध कराई। निगरानी के लिए इंजीनियर्स भी आसपास ही मौजूद रहे। इसके बाद जितना भी निर्माण शारदा ने तुड़वाया, इसी निर्माण को चारदीवारी से घेर दिया गया।
इस आठ फीट ऊंची चारदीवारी में एक गेट भी मंत्री केलिए छोड़ा गया जिससे वह सीधे अपने घर से मंदिर जा सकें। मामला खुलने के बाद इस गेट को वापस बंद करा दिया गया।
याची बृजभान यादव ने किला मोहम्मदीनगर के खसरा संख्या 250, 251 पर अवैध कब्जे का मामला हाईकोर्ट के सामने रखा। यह जमीन मुख्य सड़क पर होने की वजह से करोड़ों रुपये की है।
इस जमीन पर कब्जा करके विधायक ने मंदिर परिसर और बाहर की तरफ दुकानें बनवा दी थीं। हाईकोर्ट ने इस अवैध निर्माण को तुड़वाकर सरकारी जमीन को कब्जामुक्त कराने का आदेश दिया।
मामले में अवमानना याचिका दायर होने पर हाईकोर्ट ने एलडीए वीसी अनूप यादव को ही तलब कर लिया। इसके बाद आनन-फानन मंत्री से ही बीच का रास्ता निकलवाया गया। पूरे समय सियासी दबाव एलडीए के अधिकारियों पर दिखा।