सावन के आखिरी सोमवार पर शहर के तमाम शिवालयों में बाबा की विशेष
पूजा-अर्चना होगी।
मंदिरों में भोर से ही भक्त हाथों में फल, पुष्प,
बिल्वपत्र, गंगाजल, शहद, घी, दूध, मिठाई, भांग, धतूरा लिए उमड़ेंगे।
चारों ओर बम-बम भोले के जयघोष गूंजेंगे।
राजेंद्र नगर स्थित महाकाल शिव
मंदिर में उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर लगभग एक घंटे तक भस्म आरती
और 101 घृत दीयों से महाकाल की पूजा होगी। दिन भर रुद्राभिषेक और महाश्रृंगार
के बाद रात को 551 दीपों की मंगल आरती होगी।
यहां भस्म आरती के बाद भक्त
बाबा का अभिषेक करेंगे। डालीगंज स्थित
मनकामेश्वर महादेव मंदिर में हर बार की तरह इस बार भी भोर से पट खुलेंगे और
दिनभर रुद्राभिषेक और श्रृंगार होगा। महिला-पुरुषों की कतारें अलग से लगेंगी।
शाम की महाआरती भक्त प्रोजेक्टर पर भी देख सकेंगे।
भक्तों को यहां नि:शुल्क
गंगाजल बांटा जाएगा। ठाकुरगंज स्थित प्राचीन कल्याण गिरि मंदिर में भी भोर
से कपाट खुलेंगे। शाम को बाबा का भव्य श्रृंगार किया जाएगा। महाआरती के बीच
भक्त भजन संध्या करेंगे, महाप्रसाद बंटेगा।
चौपटियां के प्राचीन छोटे और
बड़े शिवालयों में दिनभर पूजा-अर्चना के बाद शाम को भजन संध्या में बाबा का
गुणगान होगा।
इसके अलावा डालीगंज के गोमतेश्वर महादेव मंदिर, गोमतीनगर
स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंग मंदिर, स्वप्नेश्वर महादेव मंदिर, सिद्धेश्वर
महादेव मंदिर, मौनी बाबा मंदिर समेत तमाम शिवालयों में पूजन होंगे।
कई
शिवालयों में भांग, कमल पुष्पों और मेवों का श्रृंगार होगा, वहीं भजन मंडली
बाबा का गुणगान करेगी।