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ऑनलाइन पढ़ाई और वर्क फ्रॉम होम के कारण 300 गुना बढ़ी मांग, सस्ते लैपटॉप का स्टॉक खत्म

Sat, 03 Oct 2020 01:54 AM IST
लखनऊ ब्यूरो रोली खन्ना, अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला
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कोरोना काल में ऑनलाइन पढ़ाई और वर्क फ्रॉम होम का चलन बढ़ा है। इसके चलते लखनऊ में लैपटॉप की मांग में 250 से 300 गुना तक का इजाफा हुआ है। हालांकि, बाजार में सस्ते लैपटॉप का स्टॉक खत्म है। जो लैपटॉप उपलब्ध हैं, वे महंगे हैं और उनकी भी कीमत बढ़ गई है। वहीं, जिस वेब कैमरे को कोई पूछता नहीं था, उसे अब तिगुनी कीमत पर भी लोग लेने को तैयार हैं।  
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दुकानदार ग्राहकों को यह कहकर लौटा दे रहे हैं कि माल ही नहीं है। कारोबारियों का कहना है कि न तो स्टॉक है, न माल आ रहा है और जो आ रहा है कंपनियां कीमत बढ़ाकर दे रही हैं तो हम क्या करें। फिलहाल स्टॉक की कमी नवरात्र तक दूर होने की उम्मीद है। 

हजरतगंज निवासी अभिमन्यु का पुराना लैपटॉप खराब हो गया। वर्क फ्रॉम होम के चलते वह लैपटॉप लेने बाजार गए तो 30 हजार तक के उनके बजट में कोई लैपटॉप ही नहीं था। आशियाना के राहुल दुकान पहुंचे तो पता चला कि 32 हजार वाला लैपटॉप 38 हजार में बिक रहा है। 36 हजार वाला 42 हजार का हो गया है।
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ऐसे में वह फिलहाल मोबाइल फोन से ही काम चला रहे हैं। नाजा मार्केट के कारोबारी विजय कुमार ने बताया बाजार में 40 फीसदी भी स्टॉक नहीं बचा है। 18 से 22 हजार तक के लैपटॉप तो बचे नहीं हैं। हमारे पास आई-5,आई-7 या 40 हजार के ऊपर के लैपटॉप हैं।
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इसलिए है स्टाॅक की कमी

कारोबारी बताते हैं कि भारत में चीन में बनी हार्ड डिस्क, रैम, मदर बोर्ड इस्तेमाल होती है। 90 फीसदी स्टॉक जब निकलता है तो 80 फीसदी माल पोर्ट पर डंप होता है। शिपमेंट होता है तब माल कंपनियों के पास पहुंचता है। माल डंप होने से मैन्युफैक्चरिंग नहीं हो सकी है। हालांकि, यह संकट एक हफ्ते में दूर हो जाना चाहिए। 

15 से 20 दिन में आ रहा माल
नाका बाजार में होलसेल व रिटेल मिलाकर 200-250 दुकानें हैं। कारोबारी जीवेश उपाध्याय कहते हैं कि एक कारोबारी को 500 लैपटॉप की रोजाना मांग आ रही है, पर 20-25 ही कंपनियों से मिल पा रहे हैं। माल आने में 15 से 20 दिन लग जा रहे हैं। दुकानदारों ने दाम नहीं बढ़ाए हैं। कंपनियों से ही कीमतें बढ़कर आ रही हैं। कारोबारी बताते हैं कि पहले वेब कैमरा साल-दो साल में नहीं बिकता था। एक हेडफोन महीने में बिक जाए तो बड़ी बात थी। अब लोग दोगुनी-तीन गुनी कीमत पर खरीद ले रहे हैं। 
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