सूत्रों का कहना है कि ज्यादातर कर्मचारियों की नियुक्ति में हेराफेरी हुई है। केजीएमयू में इसकी चर्चा होती रहती है। एक कर्मचारी पर सवाल उठता है तो वह दूसरे की नियुक्ति पर सवाल उठा कर मामले का पटाक्षेप कर देता है।
यह है नियम
मृतक आश्रित में नौकरी पाने के लिए जरूरी है कि मृतक की पत्नी या पति पहले से संबंधित यूनिवर्सिटी में कार्यरत ना हो। यदि कोई परिजन पहले से कार्यरत है तो अनुकंपा नियुक्ति नियमावली 5 व नियम छह के तहत मृतक आश्रित कोटे में बेटे या बेटी को नौकरी नहीं दी जा सकती है।
यह था मामला
कर्मचारी की मृत्यु होने पर पत्नी काम करती रही और पति की जगह बेटे को नौकरी दे दी गई। चिकित्सा शिक्षा प्रमुख सचिव डॉ. रजनीश दुबे ने कुलसचिव को कार्रवाई का निर्देश देते हुए नियोक्ता की जानकारी मांगी। इस पर कर्मचारी ने ऐसे नौ अन्य लोगों की भी जांच कराने की मांग कर दी, जो उसकी नियुक्ति की तर्ज पर मृतक आश्रित में कार्यरत हैं।