बागपत जिले के रहने वाले कृष्णपाल ने अपनी पारखी नजर व कड़ी ट्रेंनिग की बदौलत मजदूरी करने वाले एक बेहद गरीब परिवार के बेटे को कुश्ती का चैंपियन बना डाला। इस युवक ने भी अपने गुरु को निराश नहीं किया और एशिया कप में आयोजित 46 किलो ग्राम भार वर्ग में स्वर्ण पदक हासिल कर उनके विश्वास को कायम रखा। कृष्णपाल को उनकी मेहनत के लिए खलीफा के एवार्ड से सम्मानित किया गया।
प्रदेश स्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में शामिल होने नवाबगंज आए कृष्णपाल ने रविवार को अमर उजाला से बात करते हुए कहा कि अगर कारपोरेट घराने अन्य खेलों की तरह कुश्ती पर भी ध्यान दें तो इस खेल में भी देश के पहलवान तरक्की कर सकते है।
बागपत के रहने वाले कृष्ण पाल कुश्ती के खिलाड़ियों को तराशने का काम करते हैं। कृष्णपाल की पारखी नजर ने देश को ओलंपियन संदीप तोमर व अर्जुन एवार्ड पाने वाले सुनील राणा जैसे पहलवान दिए हैं। इस समय वह नवाबगंज में चल रही प्रदेश स्तरीय विद्यालयी कुश्ती प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए जिले में आए हैं।
रविवार को कृष्णपाल ने अमर उजाला से बातचीत करते हुए कहा कि कुश्ती को भी आधुनिक तकनीक व आर्थिक सहयोग की आवश्यकता है। इसके लिए कारपोरेट घरानों को आगे आना होगा। कारपोरेट घराने कुश्ती के खिलाड़ियों को गोद लें और उन्हे बेहतर सुविधा मुहैया कराए तो देश में पहलवानी का भविष्य काफी उज्जवल है।
कृष्णपाल ने बताया कि बागपत का रहने वाला अरशद अली काफी गरीब परिवार से है। उसके माता पिता मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं। अरशद को कुश्ती का शौक था। उन्होंने उसकी प्रतिभा को परखा और उसे तराशने का काम किया। आज अरशद थाईलैंड में आयोजित एशिया कप में गोल्ड मेडल जीत चुका है। एथेंस में वह पांचवे स्थान पर रहा। कृष्णपाल कहते हैं कि अरशद की तरह ही न जाने कितने नौजवान आर्थिक तंगी के कारण दबे पड़े है। अगर उन्हें सहायता मिले तो वह भी अपने माता पिता व देश का नाम रोशन कर सकते हैं।