‘बुनियाद’ और ‘हम लोग’ जैसे चर्चित धारावाहिक लिखने वाले साहित्यकार, पत्रकार और फिल्म कहानीकार मनोहर श्याम जोशी के लेखन के क्षेत्र में आने की कथा बड़ी दिलचस्प है। वह लखनऊ विश्वविद्यालय में पढ़ रहे थे। उन्होंने डालीगंज में रहने वाले एक वामपंथी बुद्धिजीवी परिवार में अपनी जगह बना ली थी।
इस परिवार में विज्ञान संकाय का एकमात्र छात्र होने के नाते वह बुजुर्गों की दाद लेने के लिए विज्ञान के तथ्य और विज्ञान से जुड़े रोचक प्रसंग जमकर सुनाया करते थे। उन दिनों कुमाऊं रेस्तरां में धूनी रमाने वाले एक बड़े व्यवसायी के बेटे, लेकिन कम्युनिस्ट पार्टी के समर्थक सरदार त्रिलोक सिंह ने एक दिन जोशी के मुंह से एक किस्सा सुनने के बाद कहा, ‘डियर तुम तो कहानी लेखक हो।
जैसा बोलते हो वैसा ही लिखते चले जाओ, कहानी बन जाएगी। वरिष्ठ साहित्यकार कृष्णनारायण कक्कड़ भी उन दिनों अपना नाम स्थापित कर चुके थे। उन्होंने चुटकी ली, ‘और तुम्हारे बस का कुछ है भी नहीं। जैसा आलतू-फालतू बोलते हो वैसा ही लिखते चले जाओ।’ जोशी ने त्रिलोक सिंह से कथा लेखन के कुछ और गुर बताने को कहा।