पैदल चलने में सांस फूले और गले से सीटी बजे अथवा रात में सोते वक्त सीने से घर्र-घर्र की आवाज आए तो सावधान हो जाएं। यह अस्थमा के लक्षण हैं। इसकी जांच करानी चाहिए।
इसकी दवाएं नियमित चलती हैं। हालांकि लॉकडाउन की वजह से इन दिनों मास्क का चलन बढ़ा है। वायु प्रदूषण भी कम हुआ है। यह अस्थमा रोगियों के लिए मददगार साबित होगा।
करीब 12 फीसदी बच्चे भी प्रभावित
सिविल अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आशुतोष दुबे ने बताया कि भारत में करीब 15 से 20 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित हैं। इसमें बच्चों की संख्या भी लगभग 12 फीसदी है।
सोफे व पर्दे की करें नियमित सफाई
इसकी वजह आनुवांशिक के साथ बढ़ता वायु प्रदूषण, कुछ औषधियां एवं हमारी बदलती जीवन शैली है। घर में तेज महक वाली अगरबत्ती, धूपबत्ती या सेंट का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
मिर्च-मसाला, तेल, घी और गरिष्ठ भोजन से परहेज करना चाहिए, तनाव से बचना चाहिए, ब्रीदिंग एक्सरसाइज नियमित रूप से करनी चाहिए, सिर ऊंचा करके सोना चाहिए, अस्थमा के रोगी को धूम्रपान और शराब का सेवन कभी भी नहीं करना चाहिए।
केजीएमयू के पल्मोनरी एंड क्रिटिकल केयर मेडिसिन विभागाध्क्ष डॉ. वेद प्रकाश ने बताया कि अस्थमा से बचने के लिए पर्दे, सोफे व चादर की नियमित सफाई करानी चाहिए।
अस्थमा की जांच स्पायरोमेट्री और पीकफ्लो मीटर तथा स्टैथोस्कोप से की जाती है। अस्थमा के रोगी का इलाज विशेषज्ञ चिकित्सक की देखरेख में ही कराना चाहिए।