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लखनऊ मध्य : जमीनी कार्यकर्ताओं का दिलचस्प मुकाबला, आसान नहीं यहां की चुनावी डगर

Sun, 20 Feb 2022 10:28 AM IST
ishwar ashish राजन परिहार, अमर उजाला, लखनऊ

सार

लखनऊ मध्य सीट पर भाजपा और सपा के बीच कांटे की टक्कर है। इस सीट पर दोनों दलों के जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच मुकाबला है।
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भाजपाः रजनीश गुप्ता, सपाः रविदास मेहरोत्रा, कांग्रेसः सदफ जफर, बसपाः आशीष चंद्रा, आपः नदीम अशरफ। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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सत्ता के केंद्र बिंदु विधानभवन और हजरतगंज जैसे वीआईपी क्षेत्रों वाली राजधानी लखनऊ की मध्य विधानसभा सीट पर इस बार मुकाबला जमीनी कार्यकर्ताओं के बीच है। सपा ने यहां जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर सड़क पर उतरकर संघर्ष करने के लिए चर्चित पुराने नेता रविदास मेहरोत्रा को मैदान में उतारा है। वहीं, भाजपा ने पांच बार के सभासद व काडर के युवा कार्यकर्ता रजनीश गुप्ता पर दांव लगाया है। कांग्रेस ने सीएए-एनआरसी आंदोलन के दौरान विशेष रूप से चर्चा में आईं सामाजिक कार्यकर्ता सदफ जाफर को प्रत्याशी बनाया है। यह सभी प्रत्याशी क्षेत्र में अपना प्रभाव रखते हैं।

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मुस्लिम व वैश्य मतदाता बहुल इस सीट पर पिछले दो बार के चुनावों में मुकाबला सपा-भाजपा के बीच रहा था। वर्ष 2012 में सपा के रविदास मेहरोत्रा जीते थे, तो 2017 में कानून मंत्री ब्रजेश पाठक ने जीत दर्ज की थी। राजेंद्र नगर निवासी सत्येंद्र सिंह कहते हैं, इस बार भी मुकाबला सपा-भाजपा में बताया जा रहा है। पिछली बार जीत का अंतर पांच हजार वोटों के आसपास ही था। यही नहीं सपा व कांग्रेस का गठबंधन होने पर भी यहां कांग्रेस से घोषित प्रत्याशी ने नाम वापस नहीं लिया था। यानी वोट बंटने के बावजूद जीत की राह कठिन रही थी। कांग्रेस प्रत्याशी को मिले करीब 13 हजार मतों को सपा के मतों में जोड़ दिया जाए, तो भाजपा के जीत के मतों से आंकड़ा ज्यादा निकलता है। ऐसे में इस बार भी लड़ाई कांटे की मानी जा रही है। वैसे ध्रुवीकरण होने पर भाजपा को फायदा हो सकता है।

इसके अलावा क्षेत्र के कुछ लोग मंत्री ब्रजेश पाठक की सीट बदले जाने से भी मान रहे हैं कि भाजपा के लिए यहां चुनौती है। उधर, सपा से रविदास भी अपना आखिरी चुनाव होने की बात कहकर वोट मांग रहे हैं। शुभम सिनेमा के निकट रहने वाले अनवर खान कहते हैं, रविदास हमेशा क्षेत्र के लोगों के संपर्क में रहे हैं। वह कहते भी हैं कि हम चाहे हारें या जीतें, हमने सीट कभी नहीं छोड़ी। वहीं भगवा खेमा रजनीश को संघर्षशील व युवा प्रत्याशी के तौर पर लोगों में पेश कर वोट मांग रहा है।
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प्रत्याशी भी ध्रुवीकरण के लिए हर संभव कोशिश कर रहे हैं। एक पक्ष मुस्लिम मत को निर्णायक बता रहा है तो दूसरा वैश्य, कायस्थ व ब्राह्मणों को। वैसे कांग्रेस से चुनाव लड़ रहीं सदफ जाफर, आम आदमी पार्टी से नदीम अशरफ व एआईएमआईएम के सलमान सिद्दीकी के लिए कहा जा रहा है कि इनमें मुस्लिम वोट बंटेगा। पर, दूसरी तरफ देखें तो भाजपा के लिए भी ब्राह्मण व कायस्थ मतदाताओं को बिखरने से रोकने की चुनौती है। क्योंकि, बसपा से मैदान में ताल ठोक रहे आशीष चंद्रा कायस्थ समाज के संगठन के पदाधिकारी बताए जा रहे हैं। वैसे रविदास की पकड़ वाले मतदाताओं में भी निशुल्क राशन वितरण योजना से सेंध लगने की भी भगवा खेमे को उम्मीद है। विपुलखंड कल्याण समिति के अध्यक्ष डॉ. जेके जैन कहते हैं, हमारा क्षेत्र एक छोर पर होने के कारण यहां कोई आता ही नहीं। बाकी यहां ज्यादातर भाजपा का जोर है। अलबत्ता कुछेक कर्मचारी जरूर सपा के वादों को लेकर उसके पक्ष में खड़े होते दिखाई दे रहे हैं।

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स्मार्ट सिटी वाले क्षेत्र में स्थानीय मुद्दों का भी शोर

मध्य क्षेत्र के कैसरबाग व आसपास के इलाके को सरकार स्मार्ट सिटी के रूप में विकसित कर रही है, लेकिन स्थानीय समस्याओं की फेहरिस्त भी कम नहीं। पिछले चुनावों में भी जाम, अतिक्रमण, सफाई और घने इलाकों में सड़क, गली की बदहाली के मुद्दे उठते रहे हैं और इस बार भी इनका शोर है। पर, इनका असर उतना होता दिख नहीं रहा। क्योंकि ऐसे सवालों पर ज्यादातर लोग दलील देते हैं कि वोट स्थानीय समस्याओं पर नहीं, बल्कि जाति, धर्म, कानून-व्यवस्था को लेकर डाला जाएगा।

अगल-बगल की सीटों के अलग-अलग समीकरण
मध्य विधानसभा से सटी हुईं सीटें यूं तो कई हैं, लेकिन कैंट व मध्य का बड़ा हिस्सा इससे जुड़ता है। चुनाव में इस बार इन दोनों सीटों पर अलग-अलग समीकरण हैं। पश्चिम में सपा-भाजपा में कड़ा मुकाबला बताया जा रहा है। वहीं, कैंट को भगवा खेमा सुरक्षित सीट मान रहा है।

2017 का चुनाव परिणाम
ब्रजेश पाठक, भाजपा    78,400
रविदास मेहरोत्रा, सपा    73,306
राजीव श्रीवास्तव, बसपा    24,313
अब्दुल मारूफ खान, कांग्रेस    12,921
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