चौक बाजार निवासी अमन गुप्ता बताते हैं कि भाजपा सरकार आने के बाद से कानून-व्यवस्था सुधरी है। अपराध में कमी आई है। विकास कार्य भी हुए हैं। कैराना के विकास पर काफी ध्यान दिया गया है। पहले यहां कारोबार करना भी मुश्किल था। अब व्यापारी बेखौफ अपना कारोबार करते हैं। जामा मस्जिद निवासी राशिद का कहना है कि यहां हिंदू-मुस्लिम हमेशा से मिल-जुलकर रहते आ रहे हैं। पहले के मुकाबले आपराधिक घटनाएं कम हुई हैं ये तो हम भी मानते हैं। पर, पलायन जैसी कोई बात नहीं है। इस मुद्दे को जानबूझकर हवा दी गई। बड़ी संख्या में यहां के लोग कारोबार के सिलसिले में बाहर रहते हैं। इसे पलायन नहीं कहा जा सकता। कांधला तिराहा पर मिले शमीम बताते हैं कि चुनाव में पिछली बार की तरह धर्म और जाति के आधार पर ही मतदान होगा। वे कहते हैं, अन्य मुद्दे इस बार भी यहां गौण हो जाएंगे।
दो घरानों के बीच सियासी अदावत
कैराना सीट पर लंबे अरसे से पूर्व सांसद स्व. बाबू हुकुम सिंह और मुनव्वर हसन के परिवार की सियासी अदावत चली आ रही है। इसमें कभी एक परिवार तो कभी दूसरा भारी पड़ता रहा है। इन दोनों के बाद अब अगली पीढ़ी इस सियासी अदावत को पूरी शिद्दत के साथ निभा रही है। 2014 में बाबू हुकुम सिंह यहां से सांसद चुने गए थे। उनके निधन से रिक्त हुई सीट पर उपचुनाव में सपा-रालोद गठबंधन प्रत्याशी तबस्सुम हसन ने जीत हासिल की थी। 2017 के विधानसभा के चुनाव में उनके बेटे नाहिद हसन ने जीत दर्ज की थी। चौंकाने वाली बात यह थी कि कैराना पलायन के मुद्दे को प्रदेश भर में उठाने वाली भाजपा यहीं पर चुनाव हार गई थी।
2017 का चुनाव परिणाम
नाहिद हसन -- सपा -- 98,830
मृगांका सिंह -- भाजपा -- 77,668
अनिल चौहान -- रालोद -- 19,992
दिवाकर देशवाल -- बसपा -- 6,888