हर्षित ने बताया कि अभी भी लोगों में रक्तदान को लेकर गलतफहमी है। जानकारी न होने की वजह से लोग रक्तदान करने से डरते हैं। खासकर गांवों में यह स्थिति बहुत ही गंभीर है। ग्रामीणों का मानना है कि खून देने से कमजोरी आती है, उनकी इस भ्रांति को दूर करना सबसे बड़ी चुनौती है। हमारी टीम जब भी गांव में कैंप करती है तो ज्यादा से ज्यादा ग्रामीणों को रक्तदान के फायदे बताने की कोशिश करती हैं ताकि वो भी भविष्य के रक्तदाता बन सके।
हर्षित ने बताया कि वे पूरे प्रदेश में घूम-घूमकर रक्तदान शिविर लगाते हैं। मार्च में सीतापुर में भी ऐसा ही एक कैंप लगाया था। इस कैंप में 501 यूनिट रक्तदान हुआ था। एक ही दिन में एक कैंप में रक्तदान के मामले में यह रिकॉर्ड है। इससे पहले बनारस में करीब चार सौ यूनिट रक्तदान एक ही कैंप में हुआ था।