हजेला साहब ने कहा, ‘यह आप क्या कर रहे हैं। हम तो अपील कर रहे हैं। हमने जो तथ्य बताए हैं आपने तो ठीक उसके विपरीत तथ्य लिखे हैं। ऐसा लिखकर आप खुद को और ज्यादा फंसाने की कोशिश क्यों कर रहे हैं? ’अशफाक बोले, ‘हजेला साहब! मैंने सदा आपसे कहा कि मैं केवल सिपाही हूं।
रामप्रसाद बिस्मिल हमारे लीडर हैं। वह पक्क देशभक्त और दिमाग वाले आदमी हैं। यदि किसी तरह मेरी जान की बाजी पर भी उनकी जान बच जाए तो अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई और प्रभावी व पैनी हो सकेगी क्योंकि बिस्मिल जैसा दिमाग व सूझबूझ मेरे पास नहीं है।’ हजेला साहब ने लाख मना किया, लेकिन अशफाक ने वह अपील भेज ही दी। हालांकि अंग्रेजी सरकार ने इसे खारिज कर दिया।