फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जब बिस्मिल को बचाने के लिए अशफाक ने अपने ऊपर ले लिए थे आरोप, पढ़ें, ये पूरा मामला

Tue, 23 Apr 2019 05:00 PM IST
ishwar ashish अखिलेश वाजपेयी, अमर उजाला लखनऊ
विज्ञापन
अशफाक उल्ला व रामप्रसाद बिस्मिल
विज्ञापन

प्रसिद्ध क्रांतिकारी अशफाक उल्ला के बारे में बहुत बताने की जरूरत नहीं। उनपर जब मुकदमा चल रहा था और लगभग यह साफ हो गया था कि रामप्रसाद बिस्मिल को फांसी की सजा होनी ही है। उस समय भी अशफाक ने बिस्मिल को बचाने की कोशिश की।

विज्ञापन


चीफ कोर्ट से अशफाक की अपील खारिज हो चुकी थी। अशफाक ने उस समय लखनऊ के प्रमुख वकील कृपाशंकर हजेला को अपना वकील किया। ‘अशफाक उल्ला और उनका युग’ पुस्तक के एक संस्मरण से पता चलता है, ‘चीफ कोर्ट से अपील खारिज होने के बाद हजेला साहब उनकी प्रिवी कौंसिल में अपील करने के लिए अशफाक से मिलने पहुंचे।

अशफाक ने उन्हें अंग्रेजी में एक अपील जो सरकार को भेजने के लिए लिखी थी, दिखाई। उसमें उन्होंने सारा दोष अपने ऊपर ले लिया और रामप्रसाद बिस्मिल को दोषमुक्त ठहराने का प्रयास किया।

विज्ञापन
विज्ञापन

अशफाक की अपील को अंग्रेजी सरकार ने कर दिया खारिज

अशफ़ाक़उल्ला ख़ां
हजेला साहब ने कहा, ‘यह आप क्या कर रहे हैं। हम तो अपील कर रहे हैं। हमने जो तथ्य बताए हैं आपने तो ठीक उसके विपरीत तथ्य लिखे हैं। ऐसा लिखकर आप खुद को और ज्यादा फंसाने की कोशिश क्यों कर रहे हैं? ’अशफाक बोले, ‘हजेला साहब! मैंने सदा आपसे कहा कि मैं केवल सिपाही हूं।

रामप्रसाद बिस्मिल हमारे लीडर हैं। वह पक्क देशभक्त और दिमाग वाले आदमी हैं। यदि किसी तरह मेरी जान की बाजी पर भी उनकी जान बच जाए तो अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई और प्रभावी व पैनी हो सकेगी क्योंकि बिस्मिल जैसा दिमाग व सूझबूझ मेरे पास नहीं है।’ हजेला साहब ने लाख मना किया, लेकिन अशफाक ने वह अपील भेज ही दी। हालांकि अंग्रेजी सरकार ने इसे खारिज कर दिया।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें